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किसान आंदोलनः ‘छोटा आदमी हूं, सरकार नहीं मान रही बात’, नोट लिख किसान ने की ख़ुदकुशी, अब तक 100 की मौत का दावा

मृतक किसान ने सुसाइड नोट में मांग की कि सभी राज्यों के किसान नेता दिल्ली आएं और कृषि कानूनों पर सरकार को अपनी राय दें।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: January 21, 2021 8:49 AM
Farmers Protest, Rohtakरोहतक के पकासमा गांव में सुसाइड करने वाले किसान के अंतिम संस्कार में शामिल हुई भीड़। (एक्सप्रेस फोटो)

कृषि कानून पर केंद्र सरकार का रुख थोड़ा नरम हुआ है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को किसान संगठनों के साथ बैठक में कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक लागू होने से रोकने का प्रस्ताव दिया। हालांकि, किसानों ने इस पर जल्द जवाब देने की बात कही है। इस बीच प्रदर्शनकारी किसानों की मौत का सिलसिला जारी है। भारतीय किसान यूनियन की मानें तो अब तक प्रदर्शनों के दौरान 100 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। मंगलवार रात को ही हरियाणा के रोहतक के रहने वाले एक 42 साल के शख्स ने जहर खाकर जान दे दी।

बताया गया है कि मृतक जय भगवान राणा किसान था। पिछले दो महीने में यह प्रदर्शनस्थल पर किसी किसान की आत्महत्या का पांचवा केस है। पुलिस का कहना है कि राणा ने मंगलवार शाम 7-8 बजे के आसपास सल्फास की टैबलेट खा ली और सड़क पर ही गिर पड़ा। उसे जल्दबाजी में संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी जान चली गई।

राणा रोहतक के पक्सामा गांव का रहने वाला था और उसने दो हफ्ते पहले ही अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। उसकी पत्नी और 11 साल की एक छोटी बेटी भी हैं। राणा की मौत के बाद उसका एक कथित सुसाइड नोट भी वायरल हुआ है। इसमें लिखा है, “मैं एक छोटा आदमी हूं। कृषि कानूों के खिलाफ कई किसान सड़कों पर उतर आए हैं। सरकार कहती है कि यह सिर्फ दो-तीन राज्यों का मामला है, लेकिन यहां पूरे देश के किसान हैं। यह स्थिति फंसी है, जहां किसान और सरकार दोनों ही सहमत नहीं हैं।” राणा ने चिट्ठी में मांग की कि सभी राज्यों के किसान नेता दिल्ली आएं और कृषि कानूनों पर सरकार को अपनी राय दें।

पुलिस ने कहा कि उन्हें भी राणा के नाम का एक नोट मिला है, जिसकी जांच की जा रही है। बताया गया है कि राणा का परिवार बुधवार को उसका शव लेने आया और फिर अपने गांव लौट गया। उसके पिता तकदीर (75) का कहना है कि उन्हें नहीं लगता था कि उनका बेटा कभी ऐसा कोई कदम उठाएगा। वह पूरे परिवार में अकेला व्यक्ति था, जो प्रदर्शन के लिए आया था। हम छोटे किसान हैं और हमारे पास जमीन भी नहीं है। हम गेहूं और धान उगाने में दूसरे किसानों की मदद करते हैं। राणा ने कहा था कि वह प्रदर्शन खत्म होने के बाद वापस आएगा, लेकिन वह तो हमें छोड़कर ही चला गया। हम चाहते हैं कि सरकार इन कानूनों को वापस लें। हम प्रदर्शनों की वजह से और बेटे नहीं गंवाना चाहते।

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