ताज़ा खबर
 

ढींगरा आयोग: वीआइपी रुतबे के चलते हुड्डा सरकार में राबर्ट वाड्रा को मिला लाइसेंस

राबर्ट वाड्रा की फर्म स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को 2008 में हरियाणा की तत्कालीन भूपेंदर सिंह हुड्डा सरकार के दौर में एक कॉलोनी के निर्माण के लिए लाइसेंस जारी किया गया था।

Author चंडीगढ़ | June 13, 2017 1:48 AM
प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की शादी 1997 में हुई थी। इनके दो बच्‍चे हैं बेटा रैहान और बेटी मिराय। इन दोनों ने कई साल चले अफेयर के बाद शादी की थी। दोनों की शादी 10 जनपथ पर एक सादा समारोह में हुई थी।

राबर्ट वाड्रा की फर्म स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को 2008 में हरियाणा की तत्कालीन भूपेंदर सिंह हुड्डा सरकार के दौर में एक कॉलोनी के निर्माण के लिए लाइसेंस जारी किया गया था। पर जिन अफसरों पर यह तय करने की जिम्मेदारी थी कि वे यह देखें कि आवेदक के पास इसे विकसित करने की क्षमता है या नहीं, उन्होंने इसे हरी झंडी देने के लिए फर्म के निदेशक वाड्रा के वीआइपी रसूख को आधार बनाया। उनका मानना था कि वाड्रा चूंकि सोनिया गांधी के दामाद हैं, इसलिए उनका अपना रुतबा है, लिहाजा उनके पास इसे बनाने की कूवत है। सूत्रों ने बताया कि नगर और ग्रामीण नियोजन विभाग (डिपार्टमेंट आॅफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग-डीटीसीपी) के अफसरों ने मामले की जांच कर रहे न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एसएन ढींगरा आयोग के समक्ष पेशी के दौरान यह बात कही। ढींगरा आयोग का गठन इस बात की जांच के लिए किया गया था कि गुरुग्राम में कालोनियां विकसित करने के लिए लाइसेंस किन परिस्थितियों में बांटे गए और लाइसेंस के स्थानांतरण में कहीं कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ। आयोग ने पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। हुड्डा ने ढींगरा आयोग की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि खट्टर ने राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर और उनकी छवि खराब करने के लिए इस आयोग का गठन किया है।

बहरहाल इस जांच रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। न्यायमूर्ति ढींगरा ने इस बाबत कोई टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने अपना काम कर दिया है और यह अदालतों पर निर्भर है कि वे जांच रिपोर्ट सार्वजनिककरती हैं या नहीं। सूत्रों ने बताया कि किसी कॉलोनाइजर को लाइसेंस जारी करने से पूर्व महकमे (डीटीसीपी) के अफसरों को सबसे पहले यह देखना होता है कि उसके पास इसे विकसित करने की काबिलियत है या नहीं। साथ ही भूमि के उपयोग में बदलाव के बाबत प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार भी डीटीसीपी के पास ही होता है। हरियाणा के शहरी क्षेत्र विकास व नियमन अधिनियम में यह स्पष्ट बाकी पेज 8 पर नहीं किया गया है कि भूमि उपयोग में बदलाव (सीएलयू) के लिए अर्जी देने वाले के पास उस परियोजना को विकसित करने की क्षमता है या नहीं जिसके लिए सीएलयू (चेंज आॅफ लैंड न्यूज) प्रमाणपत्र की मांग की गई है। पर कानून इस संबंध में बिलकुल स्पष्ट है कि जिसने भी भूमि उपयोग में बदलाव की मांग की है, उसके पास इसे विकसित करने की क्षमता अवश्य होनी चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि ढींगरा आयोग ने इस पहलू की गहराई से जांच की। लेकिन जानकारी यह मिली है कि उस समय डीटीसीपी में तैनात अफसरों ने आयोग को बताया कि कॉलोनी के विकास को लेकर स्काईलाइट हास्पिटैलिटी की क्षमता इसके निदेशक के रुतबे के हिसाब से आंकी गई। सूत्रों के अनुसार, गुरुग्राम के नगर नियोजन अधिकारी ने आयोग को बताया कि वाड्रा सोनिया गांधी के दामाद हैं और इसलिए अति महत्त्वपूर्ण व्यक्ति होने के नाते उनके पास कॉलोनी विकसित करने की क्षमता है। सूत्रों ने बताया कि अधिकारी की इस रिपोर्ट पर नगर और ग्रामीण नियोजन विभाग (डीटीसीपी) में उनके वरिष्ठ अफसरों और तत्कालीन मुख्यमंत्री ने भी मुहर लगा दी।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App