question about recruitment of hariyana government - Jansatta
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खट्टर के खासमखास के अनुभव पर सवाल!

प्रदेश सरकार की कृपा से नौकरी हासिल करने वाले आवेदक ने जहां अपनी ही कंपनी का अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने की औपचारिकता पूरी की है, वहीं प्रदेश सरकार ने भी इस आवेदक पर खास मेहरबानी दिखाते हुए उसे एक से अधिक पदों का कार्यभार सौंप दिया है

Author चंडीगढ़ | October 25, 2017 2:35 AM
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर। (फाइल फोटो)

संजीव शर्मा   

अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे करने जा रही हरियाणा सरकार जहां नौकरियों में पारदर्शिता के मुद्दे को जनता के बीच भुनाने की तैयारी कर रही है वहीं प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व समय के दौरान की गई राजनीतिक नियुक्ति विवादों में घिर गई है। प्रदेश सरकार की कृपा से नौकरी हासिल करने वाले आवेदक ने जहां अपनी ही कंपनी का अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने की औपचारिकता पूरी की है, वहीं प्रदेश सरकार ने भी इस आवेदक पर खास मेहरबानी दिखाते हुए उसे एक से अधिक पदों का कार्यभार सौंप दिया है। मामला हरियाणा राज्य औद्योगिक विकास और संरचना विकास निगम (एचएसआइआइडीसी) के चीफ कार्डिनेटर (इंडस्ट्री) के पद का है। प्रदेश सरकार ने करीब एक वर्ष पहले सत्ता में आने के बाद भिवानी निवासी सुनील शर्मा को इस पद पर नियुक्त किया था। शर्मा पर सरकार इतनी मेहरबान रही कि उन्हें एक पद पर नियुक्त करने के बाद अधिकारिक व अनाधिकारिक तौर पर कई पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न आयोजनों के माध्यम से किए गए एमओयू को सिरे चढ़ाने और औद्योगिक विकास के लिए विदेशी निवेश को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद उन्हें परोक्ष रूप से एचओडी माइनिंग का कार्यभार भी दिया गया। मुख्यमंत्री सुनील शर्मा की कार्यप्रणाली से इतने खुश हुए कि उन्हें हरियाणा एंटरप्राइजिज प्रमोशन कारपोरेशन की जिम्मेदारी भी सौंप डाली। सूत्रों की मानें तो हरियाणा सरकार ने इसके अलावा अन्य कई विभागों में भी सुनील शर्मा की सीधी एंट्री करवाई है।

एक तरफ जहां हरियाणा सरकार सुनील शर्मा पर मेहरबान है तो वहीं दूसरी तरफ झज्जर के गांव शेरिया निवासी सतबीर सिंह ने इस नियुक्ति में मैरिट तोड़ने सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सतबीर सिंह ने इस बारे में सीएम मनोहर लाल खट्टर, सीएम के प्रधान सचिव, उद्योग और वाणिज्य व एचएसआइआइडीसी के प्रबंध निदेशक को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी है और सीसीई के पद पर चयनित हुए सुनील शर्मा के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने सुनील शर्मा के अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच कराए जाने की मांग अपनी शिकायत में की है। राज्य सरकार ने इस पद के लिए एमबीए मार्केटिंग की डिग्री के साथ पंद्रह वर्ष के अनुभव की मांग विज्ञापन में की थी। चीफ कोआर्डिनेटर (इंडस्ट्री) का पद इसलिए बनाया गया कि सरकार के साथ औद्योगिक निवेश के  लिए किए गए एमओयू को सिरे चढ़ाया जा सके। पिछले वर्ष गुरुग्राम में हुए हैपनिंग हरियाणा में सरकार ने विभिन्न देशी-विदेशी कंपनियों के साथ करीब पौने सात करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू साइन किए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि सुनील शर्मा ने स्वयं को संगम बट्नस भिवानी में 5 मई, 2000 से लेकर 10 मई, 2007 तक लायजनिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत दिखाया है। उसका आरोप है कि संगम बट्नस को संगम पालीकैम भिवानी के नाम से 5 जुलाई, 2000 को स्वयं सुनील शर्मा ने ही रजिस्टर कराया था उद्योग विभाग के पास। इस कंपनी के प्रोपराइटर भी खुद सुनील कुमार थे।शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुभव प्रमाण-पत्र उद्योग विभाग के रिकार्ड के साथ मेल नहीं खाता। उद्योग विभाग के रिकार्ड के अनुसार इस फर्म को 2000 में बंद दिखाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि पंजाब इंफोटैक में रहते हुए भी सुनील नामक ही किसी व्यक्ति से भिवानी की कंपनी की रिटर्न फाइल की गई हैं। इस संदर्भ में एचएसआइआइडीसी विभाग के प्रबंध निदेशक वीएस वुंडरू से बात की गई तो उन्होंने कहा, सतबीर सिंह नामक एक व्यक्ति ने ईमेल से शिकायत की है। सुनील शर्मा के अनुभव प्रमाण-पत्र पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। शिकायत का अध्ययन किया जा रहा है और इसकी सत्यता का पता लगाया जाएगा।  इस बारे में सुनील शर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा, ये आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। मुझे तो इस बात का भी पता नहीं कि कोई शिकायत आई है। अगर शिकायत आई भी है तो उस पर जवाब देना विभाग का काम है। इस बारे में आज जब मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर से बात की गई तो उन्होंने किसी तरह की शिकायत की जानकारी होने से इनकार कर दिया और शर्मा से जब उनके कार्यालय में बात की गई तो वह फोन पर उपलब्ध नहीं हुए।

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