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कंपनी ने फोन को बताया वॉटरप्रूफ, जज ने अदालत में पानी मंगवाया, डालते ही हुआ खराब तो दिया यह आदेश

यहां एक शख्स ने पचास हजार रुपए से ज्यादा की कीमत का मोबाइल फोन खरीदा। जिस वक्त कंपनी ने फोन खरीदा तब कर्मचारियों ने दावा किया कि उनकी डिवाइस वॉटरप्रूफ है, इसपर पानी का कोई असर नहीं होगा। मगर बाद में फोन किसी तरह पानी की जद में आने से खराब हो गया।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

आमतौर पर देश-विदेश की मोबाइल कंपनियां दावा करती हैं कि उनका फोन हर स्तर पर सबसे अच्छा है। लेकिन एक ऐसे ही मामले में एक मोबाइल कंपनी को उपभोक्ता अदालत में मुंह की खानी पड़ गई। कोर्ट ने मोबाइल कंपनी के कर्मचारियों को ना सिर्फ फटकार लगाई बल्कि हर्जाना देने को भी कहा। दरअसल मामला हरियाणा के झज्जर का है। यहां एक शख्स ने पचास हजार रुपए से ज्यादा की कीमत का मोबाइल फोन खरीदा। जिस वक्त कंपनी ने फोन खरीदा तब कर्मचारियों ने दावा किया कि उनकी डिवाइस वॉटरप्रूफ है, इसपर पानी का कोई असर नहीं होगा। मगर बाद में फोन किसी तरह पानी की जद में आने से खराब हो गया। शख्स ने कंपनी को उसका दावा याद दिलाया तो कर्मचारी मुकर गए और फोन बदलने से या इसकी कीमत देने से इनकार दिया।

कंपनी के कर्मचारियों के व्यवहार के बाद शख्स अदालत की शरण में गया और हर्जाना दिलाने की गुहार लगी। बीते बुधवार (17 अक्टूबर, 2018) को मामले में जब सुनवाई हुई तो फैसला शख्स के पक्ष में आया। शख्स ने अदालत को बताया कि कंपनी का दावा झूठा था जिसमें कहा गया था कि पानी में उनका फोन खराब नहीं होगा। उपभोक्ता ने तर्क दिया कि कंपनी झूठा प्रचार कर रही है। इस दौरान कंपनी के कर्मचारियों और ग्राहक के बीच बहस हुई। कोर्ट ने कंपनी के दावे की जांच के लिए पानी मंगवाया और फोन पानी में डाल दिया। इसपर फोन खराब हो गया।

मामले साफ होने के बाद कोर्ट ने मोबाइल कंपनी को आदेश दिया कि शख्स के मोबाइल को ठीक करवा दे या नया फोन दे। नहीं तो मोबाइल की कीमत 56 हजार रुपए दी जाए। इसके अलावा कोर्ट हर्जाने के रूप में साढ़े सात हजार रुपए अलग से देने का भी हुक्म दिया।

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