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हरियाणा में 29 जनवरी से फिर शुरू हो रहा जाट आंदोलन, गुड़गांव, रोहतक में लगाई गई धारा 144

जाट आरक्षण की मांग को लेकर पिछले साल फरवरी में हरियाणा में आंदोलन हुआ था। इस दौरान जगह-जगह हिंसक घटनाएं भी हुई थीं।

Author Updated: January 28, 2017 8:08 PM
पिछले साल जाट आंदोलन के दौरान दिल्‍ली को पानी सप्‍लाई करने वाले पश्चिमी यमुना नहर और मुणक नहर बैैराज के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। (ANI)

हरियाणा के जाट संगठनों ने मनोहर लाल खट्टर सरकार पर आरक्षण की अपनी मांग को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए राज्य के 19 जिलों में फिर से आंदोलन करने की चेतावनी दी है। जाट नेता यशपाल मलिक की अगुवाई वाली अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने 29 जनवरी से आंदोलन का ऐलान कर रखा है। इसके मद्देनजर गुड़गांव और रोहतक जिला प्रशासन ने एहतियातन जिले के कई हिस्सों में धारा 144 लगा दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक गुड़गांव और रोहतक दोनों जिलों में रेलवे स्टेशनों सहित राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से करीब 500 मीटर की दूरी में पांच या उससे अधिक लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

रोहतक में जगह-जगह पुलिस नाके लगाए गए हैं। रोहतक रेंज के आईजी नवदीप सिंह विर्क ने खुद पुलिस नाकों का जायजा लिया। आईजी ने कहा कि पुलिस प्रशासन हर प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

हरियाणा सरकार ने राज्य में 7,000 होमगार्डों की तैनाती के अलावा केंद्र से अर्धसैनिक बलों की 55 कंपनियों की मांग की है। ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके। पिछले साल जाट आंदोलन में 30 लोगों की मौत हो गई थी और व्यापक तोड़फोड़ की घटनाएं हुयी थीं। इस हिंसा में गुड़गांव, रोहतक, सोनीपत एवं झज्जर सहित कुछ पड़ोसी जिले बुरी तरह प्रभावित हुए थे। कई दिनों तक ट्रेनों का आवागमन बाधित रहा था। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में होनेवाले दूध, फल और सब्जी की सप्लाई पर भी बुरा असर पड़ा था।

गौरतलब है कि जाट आरक्षण की मांग को लेकर पिछले साल फरवरी में हरियाणा में आंदोलन हुआ था। इस दौरान जगह-जगह हिंसक घटनाएं भी हुई थीं। बाद में हरियाणा सरकार की पहल पर जाट समुदाय ने आंदोलन वापस लिया था। इस दौरान जाट समुदाय के अनेक युवाओं पर केस दर्ज हुए थे और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस बीच हरियाणा सरकार ने जाट समेत 6 जातियों को आरक्षण दे दिया था। बाद में यह मामला हाईकोर्ट पहुंच गया जहां ये फिलहाल विचाराधीन है। अब प्रदेश में एक बार फिर जाट आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन की घोषणा की गई है।

उधर, सोनीपत की छोटूराम धर्मशाला में हरियाणा और दिल्ली के खांप पंचायतों की महापंचायत हुई जिसमें जाट आरक्षण आंदोलन को खापों ने समर्थन नहीं करने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं खाप पंचायतों का 51 सदस्यीय दल जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पिछले वर्ष आरक्षण के दौरान हुए मुकद्दमे रद्द करने और जेल में बंद जाट युवा नेताओं को रिहा कराने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात करने वाला है।

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