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डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर आरोपों की पूरी लिस्‍ट

डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति व मीडियाकर्मियों की पंचायत हुई। इसमें डेरा सच्चा सौदा की ओर से लिखित माफी मांगी गई और विवाद खत्म हुआ।

Author नोएडा | August 24, 2017 11:42 AM
डेरा सच्चा सौदा के मुखिया गुरुमीत राम रहीम अभी जेल में।

1998में गांव बेगू का एक बच्चा डेरा की जीप तले कुचला गया। गांव वालों के साथ डेरे का विवाद हो गया। घटना का समाचार छापने वाले समाचार पत्रों के नुमाइंदों को भी कथित तौर पर धमकाया गया। डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति व मीडियाकर्मियों की पंचायत हुई। इसमें डेरा सच्चा सौदा की ओर से लिखित माफी मांगी गई और विवाद खत्म हुआ।

2002 मई में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए डेरे की एक साध्वी ने गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री को भेजा। इसकी एक प्रति पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भी भेजी गई।

10 जुलाई 2002 को डेरा सच्चा सौदा की प्रबंधन समिति के सदस्य रहे कुरुक्षेत्र के रणजीत की हत्या हुई। आरोप डेरा प्रबंधन पर लगे। पुलिस जांच से असंतुष्ट रणजीत के पिता ने जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआइ जांच की मांग की।
24सितंबर 2002 को हाईकोर्ट ने साध्वी यौन शोषण मामले में गुमनाम पत्र का संज्ञान लेते हुए डेरा सच्चा सौदा की सीबीआइ जांच के आदेश दिए। सीबीआइ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

24 अक्तूबर 2002 को सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक रामचन्द्र छत्रपति को गोली मारी गई। आरोप डेरा समर्थकों पर लगा।16 नवंबर, 2002 को सिरसा में मीडिया की महापंचायत बुलाई गई और डेरा सच्चा सौदा का बहिष्कार करने का प्रण लिया। 21 नवंबर, 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति की दिल्ली के अपोलो अस्पताल में मृत्यु हो गई। जनवरी 2003 में पत्रकार छत्रपति के पुत्र अंशुल छत्रपति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर छत्रपति प्रकरण की सीबीआइ जांच करवाने की मांग की। याचिका में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह पर हत्या किए जाने का आरोप लगाया गया। उच्च न्यायालय ने पत्रकार छत्रपति व रणजीत हत्या मामलों की सुनवाई एक साथ करते हुए 10 नवंबर, 2003 को सीबीआइ को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश जारी किए। दिसंबर 2003 में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। दिसंबर 2003 में डेरा के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जांच पर रोक लगाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया। नवंबर 2004 में दूसरे पक्ष की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने डेरा की याचिका खारिज कर दी। सीबीआई ने डेरा प्रमुख सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया।
2007 मई में डेरा सलाबतपुरा (बठिंडा, पंजाब) में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा धारण कर फोटो खिंचवाए और उन्हें अखबारों में छपवाया। 13 मई, 2007 को सिखों ने गुरु गोबिंद सिंह की नकल किए जाने के विरोध स्वरूप बठिंडा में डेरा प्रमुख का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारी सिखों पर डेरा प्रेमियों ने हमला बोल दिया, जिसके बाद 14 मई, 2007 को पूरे उत्तर भारत में हिंसक घटनाएं हुर्इं। सिखों व डेरा प्रेमियों के बीच जगह-जगह टकराव हुए। 17 मई, 2007 को प्रदर्शन कर रहे सिखों पर सुनाम में डेरा प्रेमी ने गोली चलाई, जिसमें सिख युवक कोमल सिंह की मौत हो गई, जिसके बाद सिख जत्थेबंदियों ने डेरा प्रमुख की गिरफ्तारी को लेकर आंदोलन किया। पंजाब में डेरा प्रमुख के जाने पर पाबंदी लग गई। 18 जून, 2007 को बठिंडा की अदालत ने राजेन्द्र सिंह सिद्धू की याचिका पर डेरा प्रमुख के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।

31जुलाई 2007 को सीबीआई ने हत्या मामलों व साध्वी यौन शोषण मामले में जांच पूरी कर चालान न्यायालय में दाखिल कर दिया। सीबीआई ने तीनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया। -तीनों मामले पंचकूला स्थित सीबीआइ की विशेष अदालत में विचाराधीन हैं। 2007 से लेकर अब तक इन तीनों मामलों की अदालती कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए डेरा सच्चा सौदा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

डेरे के खिलाफ मामलों की स्थिति
रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड 16 सितंबर 2017
साध्वी यौन शोषण 26 अगस्त 2017
रणजीत सिंह हत्याकांड 16 सिंबर 2017
साधुओं को नपुंसक बनाने की कार्रवाई सीबीआई जांच जारी

जाम-ए-इंसां पिलाया और शुरू हो गया विवाद

डेरा प्रमुख के नाम को लेकर भी लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है। डेरा प्रमुख का मूल नाम गुरमीत सिंह है। इसके बाद वर्ष 2000 के दौरान जब डेरे से जुडेÞ विवाद सार्वजनिक होने लगे तो डेरा प्रमुख ने डेरा सच्चा सौदा की एक ऐसी छवि बनाने का प्रयास किया जिसमें यह संदेश गया कि डेरा सभी धर्मों का सम्मान करता है और डेरे में सभी धर्मों के लोग आते हैं। लिहाजा संत गुरमीत सिंह ने अपना नाम संत गुरमीत राम रहीम सिंह के रूप में प्रचारित किया। इसके बाद वर्ष 2007 में जब बठिंडा जिले के सलाबतपुरा के डेरे में सिखों के गुरुगोबिंद सिंह की पोशाक पहनकर अनुयायियों को जाम-ए-इंसां पिलाया तो पूरे उत्तर भारत में विवाद हो गया। इसके बाद डेरा मुखी ने अपने नाम के आगे इंसां लगा लिया और समूचे अनुयायियों को अपने नाम के आगे इंसा लगाने का संदेश दिया।
आज हरियाणा व पंजाब समेत समूचे देश में डेरा अनुयायी अपने नाम के आगे इंसां शब्द लगा रहे हैं।

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