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राधास्वामी संप्रदाय का विस्तार है डेरा सच्चा सौदा

शाह मस्ताना जी ने इन रेत के टीलों में बैठकर तप किया और यहीं से डेरा की प्रसिद्ध शुरू हो गई।
Author August 23, 2017 03:54 am
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह (File Photo)

हरियाणा के सिरसा जिले में स्थित डेरा सच्चा सौदा की आज दुनिया भर में जहां हजारों शाखाएं हैं वहीं इतनी ही संख्या में अनुयायियों के लिए नामचर्चा घर बनाए गए हैं। सिरसा जिले के गांव नेजिया व बेगू की जमीन पर बसा डेरा सच्चा सौदा आज भले ही करीब एक हजार एकड़ में फैल चुका है लेकिन दशकों पहले जब शाह मस्ताना जी यहां आए थे तो यह क्षेत्र न केवल बागड़ की धरती के नाम प्रसिद्ध था बल्कि यहां 20 से 30 फुट ऊंचे रेत के टीले थे। शाह मस्ताना जी ने इन रेत के टीलों में बैठकर तप किया और यहीं से डेरा की प्रसिद्ध शुरू हो गई।

डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों से बातचीत करने पर पता चला कि यह डेरा मूल रूप से राधास्वामी संप्रदाय का ही विस्तार है। राधास्वामी संप्रदाय के तत्कालीन संत सावन सांई ने अपने दो शिष्यों खेमा मल (मस्ताना जी) व चरण सिंह को अलग-अलग दिशाओं में धर्म प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी। इसके कारण चरण सिंह को डेरा ब्यास की गद्दी और शाह मस्ताना को बागड़ क्षेत्र में भेज दिया। कुछ समय पश्चात जब शाह मस्ताना जी महाराज ने यहां तप शुरू किया तो उन्होंने सावन सांई महाराज से अपने लिए अलग नारा बख्शवा लिया। जिन्हें ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ का नारा दिया गया। यहां आने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उन्होंने 29 अप्रैल 1948 को डेरासच्चा सौदा की आधारशिला रखी। करीब 12 साल तक उन्होंने यहां धर्म प्रचार का काम किया। वर्ष 1960 में यहां गद्दी संभालने वाले मूल रूप से सिरसा जिला निवासी शाह सतनाम जी महाराज ने 26 अगस्त, 1990 तक करीब 12 लाख लोगों ने यहां का भ्रमण किया। शाह सतनाम जी के बाद डेरे की गद्दी संभाली संत गुरमीत सिंह ने। डेरा सच्चा सौदा जहां धर्म प्रचार के कार्यों को बढ़ावा दे रहा है वहीं डेरा प्रमुख से जुडेÞ विवाद भी कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं।

 

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