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हिसार-रेवाड़ी में रेलवे ट्रैक पर उत्पात मचाने के बाद जाट नेताओं ने दी चेतावनी- अब दिल्ली में दूध-सब्जी रोकेंगे

सूचना मिलते ही रेलवे लाइन के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स, रेलवे पुलिस और हरियाणा पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए।

रामायण गांव के नजदीक रेलवे ट्रक पर 29 दिन से धरने पर बैठे जाट नेताओं ने काली चुनरी और काली पगड़ी पहनकर विरोध किया।

जाट आरक्षण को लेकर जाट संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को हिसार-रेवाड़ी रेलवे ट्रैक पर जमकर उत्पात मचाया। यहां रामायण गांव के नजदीक रेलवे ट्रैक पर 29 दिन से धरने पर बैठे जाट नेताओं ने काली चुनरी और काली पगड़ी पहनकर विरोध किया। अप्रत्याशित भीड़ में कुछ युवकों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया और रेलवे फाटकों को भी तोड़ा। इस दौरान तैनात पुलिस और आरएएफ के जवान तमाशबीन बने खड़े रहे। ट्रैक पर यह तमाशा करीब 2 घंटे तक चला। बाद में जाट नेताओं ने युवकों को समझा – बुझाकर रेलवे ट्रैक खाली करवाया। इस बीच हांसी रेलवे स्टेशन पर पहुंची सभी ट्रेनों को स्टेशन पर ही रोक दिया गया और हिसार से भिवानी जाने वाली मालगाड़ी जो कि सातरोड रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई थी उसे भी बैक गियर लगाकर वापस हिसार भेज दिया गया।

सूचना मिलते ही रेलवे लाइन के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स, रेलवे पुलिस बल और हरियाणा पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए। सबकुछ सामान्य हो जाने के करीब दो घंटे बाद वहां से एक मालगाड़ी को गुजारा गया। वहीं इससे पहले धरने पर बैठे जाट समुदाय को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा कि आज के इस जनसैलाब को देखकर सरकार को चेतना चाहिए। यह काला दिवस सरकार की जाट विरोधी मंशा को साफ दर्शाता है कि समुदाय के लोगों में इस सरकार के खिलाफ कितना आक्रोश है।

उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर बिना अधिकारों के अधिकारियों को उनके पास बातचीत के लिए भेजती है। इसलिए दो दौर की बात का कोई नतीजा नहीं निकला। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो काला दिवस के बाद एक मार्च को वो सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चलाकर दिल्ली में जाने वाली दूध, सब्जी और अन्य सामग्री सील कर देंगे और उसके बाद दिल्ली कूच कर जाएंगे।

वहीं हरियाणा में मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल ने प्रदर्शन कर रहे जाटों का खुलकर समर्थन करते हुए सरकार से उनकी मांगें मानने को कहा है। उधर, हाल के जाट आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी है और राज्य पुलिस भी कड़ी सतर्कता बरत रही है।

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