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हरियाणा- यही हाल रहा तो दम तोड़ देंगे उद्योग

केंद्र सरकार ने हाल ही में कई मदों में जीएसटी कम किया है लेकिन हरियाणा के विज्ञान उद्योग को इससे राहत नहीं मिली है। यहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर आज भी 18 से 28 फीसद तक कर बरकरार है।
Author चंडीगढ़ | October 12, 2017 05:15 am
प्रतीकात्मक फोटो। (फाइल) (express Photo)

संजीव शर्मा

केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी (गुडस सर्विस टैक्स) लागू करने के बाद हरियाणा ने भी विधानसभा में इसे पारित तो कर दिया गया लेकिन सच्चाई यही है कि लाख प्रयासों के बावजूद प्रदेश सरकार अभी तक न तो राज्य के व्यापारी वर्ग को संतुष्ट कर पाई है और न ही उपभोक्ताओं को जीएसटी के जाल से निकाल पाई है।
हरियाणा के अंबाला जिले का विज्ञान उद्योग दुनिया भर में मशहूर है तो वहीं पानीपत का कंबल व कारपेट उद्योग के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यमुनानगर प्लाईवुड उद्योग, करनाल आॅटोमोबाइल व बासमती की पैदावार के लिए प्रसिद्ध है तो गुरुग्राम देश की दूसरी आइटी राजधानी बन चुका है। जीएसटी लागू होने के बाद हर वर्ग के उद्योगपति और कारोबारी खासे परेशान हैं।

केंद्र सरकार ने हाल ही में कई मदों में जीएसटी कम किया है लेकिन हरियाणा के विज्ञान उद्योग को इससे राहत नहीं मिली है। यहां इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर आज भी 18 से 28 फीसद तक कर बरकरार है। जीएसटी लागू होने से पहले तक विज्ञान उद्योग पर केवल 5.25 फीसद ही वैट था। साइंस आप्रेट्स मैन्यूफैक्चरर एंड एक्सपोर्टर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष महेश सिंघल के अनुसार अंबाला में हजारों लोग इस उद्योग से जुडेÞ हुए हैं। यहां के विज्ञान उद्यमी शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का निर्माण करते हैं। शिक्षा व चिकित्सा के मुकाबले विज्ञान उद्योग पर लगाया गया जीएसटी देख लिया जाए तो सरकार की नाइंसाफी साफ तौर पर सामने आ जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योग पर थोपे गए 28 फीसद जीएसटी को लेकर उद्योगपति चुप नहीं बैठेंगे।

कुछ ऐसी ही स्थिति प्लाईबोर्ड उद्योग की भी है। हरियाणा प्लाइबोर्ड मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान अजय मानिकटाला के अनुसार लक्कड़ खरीद पर 18 फीसद जीएसटी और दो फीसद बाजार शुल्क देना पड़ रहा है। इतना कर व्यापारी नहीं दे पाएंगे और वे घाटे में चले जाएंगे। उन्होंने पहले भी सरकार से मांग की थी कि प्लाइबोर्ड पर 28 के बजाय 12 फीसद जीएसटी लगाया जाए और बाजार शुल्क खत्म किया जाए। इस उद्योग पर कर का बोझ बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्लाईबोर्ड उद्योग लाखों लोगों को रोजगार दे रहा है। अगर सरकार ने कर नहीं घटाया तो ये उद्योग बंद हो जाएंगे। इससे लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। साथ ही हरियाणा, यूपी, पंजाब, हिमाचल प्रदेश के किसानों को भी भारी नुकसान होगा क्योंकि उनके द्वारा उत्पादित पापुलर और सफेदे की खपत यहां पर हो रही है। उद्योग बंद होने से पापुलर व सफेदे खरीदने वाला कोई नहीं होगा। अखिल भारतीय अध्यक्ष देवेंद्र चावला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतीश चौपाल के अनुसार प्रदेश की पूर्व तथा वर्तमान सरकार ने प्लाईबोर्ड उद्योग के उत्थान के लिए कोई ठोस योजना लागू नहीं की। चावला के अनुसार लक्कड़ खरीद पर 28 फीसद जीएसटी और दो प्रतिशत बाजार शुल्क देना पड़ रहा है।

पानीपत में कंबल उद्योग से जुडेÞ कारोबारी भी जीएसटी से परेशान हैं। इसके लागू होने से पानीपत के हैंडलूम उद्योग पर भारी मार पड़ी है। इससे यहां के हजारों लोग जुडेÞ हुए हैं। पानीपत में हैंडलूम का कारोबार लघु, मध्यम तथा उच्च स्तरीय औद्योगिक श्रेणी में आता है।
पानीपत कंबल मार्केट एसोसिएशन के प्रधान अशोक नारंग तथा चैंबर आॅफ टेक्सटाइल मेन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान राकेश चुघ के अनुसार जीएसटी की वजह से यहां के 30 हजार उद्योग ठप होने के कगार पर हैं। इससे उद्यमियों के साथ-साथ शहर के करीब तीन लाख श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट हो जाएगा। हरियाणा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अनिल भाटिया के अनुसार बिना तैयारी लागू जीएसटी से व्यापारी वर्ग परेशान है। साइट न खुलने पर अब तक तीन बार रिटर्न की तारीख बढ़ा दी गई है। कहा कुछ जाता है, होता कुछ है। व्यापारी बाजार में सामान लेने जाता है तो उससे जीएसटी नंबर मांगा जाता है।

क्या कहते हैं कैप्टन अभिमन्यु

हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार पहली अप्रैल से 31 अगस्त 2017 तक की अवधि के दौरान बीते साल की इसी अवधि की तुलना में राजस्व में 9.32 प्रतिशत के आबकारी शुल्क सहित 42.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हरियाणा 31 अगस्त तक माल और सेवा कर (जीएसटी) के रूप में जमा 4647.94 करोड़ रुपये की राशि के साथ अपने पड़ोसी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा जीएसटी जमा करवाने वाला छठा सूबा बन गया है। जीएसटी के तहत अपना नाम दर्ज कराने वाले डीलरों में 76.98 प्रतिशत ने अपना जीएसटीआर 3बी रिटर्न भरा है, जबकि इसका वर्तमान राष्ट्रीय औसत 72 प्रतिशत है।
कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार पहले प्रदेश में करीब ढाई लाख व्यापारी विभिन्न तरह के टैक्स जमा कर रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा तीन लाख 31 हजार 786 पर पहुंच गया है। पिछले तीन महीने में कुल एक लाख एक हजार 409 टैक्स चुकाने वाले व्यापारी बढ़े।

दो लाख 30 हजार 377 डीलर ऐसे हैं जो वैट से जीएसटी के दायरे में आए हैं। नए रजिस्ट्रेशन भी हुए। जाहिर है कि व्यापारियों का भरोसा बढ़ा है। वित्तमंत्री ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद नौ महीने में हरियाणा को करीब 20 हजार करोड़ रुपए बतौर क्षतिपूर्ति मिलने का अनुमान है। पहले दो महीने जुलाई और अगस्त की क्षतिपूर्ति के तौर पर 467 करोड़ रुपए प्रदेश को मिल चुके हैं। कैप्टन अभिमन्यु के अनुसार हरियाणा देश में छठा उच्चतम जीएसटी जमा करवाने वाला राज्य है। हरियाणा के मुकाबले पड़ोसी राज्य पंजाब ने 1,516.32 करोड़ रुपए, हिमाचल प्रदेश ने 820.67 करोड़ रुपए , जम्मू-कश्मीर ने 263.99 करोड़ रुपए , उत्तराखंड ने 1,688.34 करोड़, दिल्ली ने 3,236.91 करोड़, राजस्थान ने 2,535.24 करोड़ और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने 174.1 करोड़ रुपए जमा करवाए हैं।

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