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गोचर भूमि समाप्ती को ओर लेकिन आज भी सड़कों पर लाखों गोवंश

हरियाणा में 408 गोशालाएं कार्यरत हैं जिनमें 3,06,490 पशु हैं। इनमें से 392 गोशालाएं पंजीकृत हैं और 16 गोशालाएं अपंजीकृत हैं।

Author चंडीगढ़ | August 3, 2017 04:40 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

संजीव शर्मा

हरियाणा की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की राजनीति भले ही गायों तक सिमटी हुई है लेकिन प्रदेश में आज भी लाखों की संख्या में गाय सड़कों पर हैं और गोचर भूमि का कहीं कोई पता नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में पूर्व की हुड्डा तथा वर्तमान खट्टर सरकार की नीतियों में कोई फर्क नहीं है। नतीजतन प्रदेश में गोचर भूमि लगातार समाप्त होती जा रही है। हरियाणा में 408 गोशालाएं कार्यरत हैं जिनमें 3,06,490 पशु हैं। इनमें से 392 गोशालाएं पंजीकृत हैं और 16 गोशालाएं अपंजीकृत हैं। पंजीकृत गोशालाओं में 3,04,833 तथा अपंजीकृत गोशालाओं में 1657 पशु हैं। हरियाणा में गोचर भूमि का विवाद पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है लेकिन किसी भी सरकार ने इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए। हालांकि हरियाणा सरकार ने गोचर भूमि को कब्जा मुक्त कराने की दिशा में बडेÞ-बडेÞ दावे कर रही है लेकिन आज भी करीब एक लाख 80 हजार एकड़ गोचर भूमि पर कब्जे हैं। पिछले दस वर्ष के दौरान हरियाणा में करीब दस लाख एकड़ ऐसी भूमि का इस्तेमाल किया जा चुका है।

हरियाणा में परंपरा रही है कि ग्राम पंचायत की कुल भूमि का पांच फीसद हिस्सा गायों के चरागाह के लिए छोड़ा जाता है। वर्ष 1990 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने पंजाब विलेज कॉमन लैंड एक्ट को संशोधित करके चरागाह भूमि को पंचायत की भूमि में शामिल कर दिया और जमीन को ठेके पर देना शुरू कर दिया। यहीं से गोचर भूमि का विवाद शुरू हो गया।
पूर्व हुड्डा सरकार ने पंचायत भूमि में शामिल हुई गोचर भूमि पर दलितों को 100-100 गज के प्लाट आवंटित किए। इसके बाद प्रदेश में यह चुनावी मुद्दा भी बना। भाजपा ने सत्ता में आने से पहले पूरे प्रदेश के सभी गावों में गोचर भूमि को कब्जा मुक्त कराने का एलान भी किया, लेकिन मनोहर लाल खट्टर सरकार अब इसी पंचायती अथवा गोचर भूमि को उद्योगपतियों को पट्टे पर देने की तैयारी कर रही है। हरियाणा के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ पंचायतों की जमीन उद्योगों को दिए जाने की योजना का परोक्ष रूप से विरोध करते हुए कहते हैं कि गो अभयारण्य की स्थापना लगभग 50 से 100 एकड़ भूमि में की जानी है। पीने के पानी, पशुओं के शैड, चारदीवारी, पशु अस्पताल, चारे के लिए स्टोर, परिचरों के लिए आवास, ट्यूबवेल, पावर बैकअप आदि की समुचित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी प्रस्तावित हैं। विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा विस्तृत अनुमानित खर्च गो अभयारण्य के निर्माण के लिए तैयार किया गया है।

एक गो अभयारण्य के निर्माण के कार्य, मशीनरी व उपकरणों की कीमत 4.30 करोड़ रुपए आएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने गांव नैन जिला पानीपत में ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध करवाई गई 50 एकड़ भूमि पर गो अभयारण्य की स्थापना की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। हिसार में गो अभयारण्य की स्थापना के लिए प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा राजकीय पशुधन फार्म की 50 एकड़ भूमि को नगर निगम, हिसार को प्रतिवर्ष एक रुपए के राशि पर 33 वर्ष तक लीज पर देने के प्रस्ताव का अनुमोदन कर दिया गया है।जल्द ही लीज एग्रीमेंट किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गांव अलीशेर पुर माजरा, जिला यमुनानगर में 95 एकड़ भूमि का चयन किया गया है जिसके लिए विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा लीज आदेश जारी कर दिए गए हैं।

 

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