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हरियाणा- पढ़ाई-लिखाई के लिए ‘दंगल’ में उतरीं बेटियां

हरियाणा की बेटियों ने शिक्षा का अधिकार हासिल करने के लिए अपने बूते शांतिपूर्वक जंग छेड़ रखी है।

Author चंडीगढ़ | May 31, 2017 3:59 AM
इन छात्राओं की मांग है कि स्कूल को 12वीं तक किया जाए (फोटो सोर्स इंडियन एक्सप्रेस)

संजीव शर्मा

हरियाणा की बेटियों ने शिक्षा का अधिकार हासिल करने के लिए अपने बूते शांतिपूर्वक जंग छेड़ रखी है। बार-बार मांग करने के बावजूद सरकार के उदासीन रहने पर अब स्कूलों को अपगे्रड करवाने के लिए उन्होंने अनशन, धरना-प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू किया है। लिंगानुपात में लगातार बदनाम इस प्रदेश में हालांकि महावीर फोगाट जैसे पिता ने अपनी तीन बेटियों को विश्वस्तरीय पहलवान बनाकर नाम रोशन किया है लेकिन शिक्षा के मामले में अभी भी बेटियों का ‘दंगल’ जारी है।  दिलचस्प यह है कि एक तरफ हरियाणा सरकार प्रदेश की 50वीं वर्षगांठ मना रही है और दूसरी तरफ यहां की बहादुर बेटियां पढ़ाई के दिनों में धरने-प्रदर्शन करके शिक्षा का अधिकार मांग रही हैं। यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा की इसी धरती से ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे राष्टÑव्यापी अभियान को शुरू कर चुके हैं। हालांकि सरकार दबी-दबी आवाज में यह दावा कर रही है की छात्राओं के धरनों के पीछे बड़ी राजनीति हो रही है, क्योंकि इन छात्राओं को खुले तौर पर उनके अभिभावकों और ग्रामीणों ने समर्थन किया है।

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रेवाड़ी से जली जोत
रेवाड़ी जिले के गांव गोठड़ा टप्पा में पहली बार छात्राओं ने स्कूल अपग्रेड करने की मांग को लेकर धरना दिया। इसके बाद यह सिलसिला पूरे प्रदेश में शुरू हो गया जो अब तक जारी है। हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद शायद अपनी तरह का यह पहला मामला है जहां लड़कियों को उच्च शिक्षा पाने के लिए धरने-प्रदर्शनों का सहारा लेना पड़ रहा है। पड़ोसी राज्यों में भी फिलहाल यह रवायत शुरू नहीं हुई है।

जींद, भिवानी, पानीपत में भी अलख
रेवाड़ी के बाद जींद जिले के गांव करसोला, भिवानी जिले के गांव बिड़ौला, पानीपत के गांव नांगल खेड़ी, फरीदाबाद जिले के गांव सेवली, रेवाड़ी जिले के गांव राजगढ़, कैथल जिले के गांव कलायत, गुरुग्राम के गांव कादरपुर तथा पलवल जिलों में भी छात्राएं स्कूल को अपग्रेड करने की मांग पर धरने दे चुकी हैं।

सरकार सकारात्मक नहीं
वर्तमान में स्कूल अपग्रेड की मांग पर धरना देने वाली छात्राएं जहां सरकार के खिलाफ लामबंद हो रही हैं वहीं प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर गंभीरता तो दिखा रही है लेकिन सकारात्मक रुख अपनाने को तैयार नहीं है। अब तक प्रदेश के जिन जिलों में छात्राओं ने स्कूल अपग्रेड करने की मांग को लेकर धरने दिए हैं उनमें से जींद जिले की महिला साक्षरता दर औसतन 61.6 फीसद रही है।

सरकार को सुझाव

हरियाणा में पिछले लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय करनाल निवासी कुलजिंदर मोहन बाठ कहते हैं कि यह हरियाणा का दुखद पहलू है कि छात्राओं को स्कूल अपग्रेड करवाने के लिए धरना देना पड़ रहा है। घरेलू हालात के कारण छात्राओं के लिए यह संभव नहीं है कि दूसरे गांवों में पढ़ाई कर सकें। ऐसी परिस्थितियों के पैदा होने से पहले ही स्कूल प्रबंधकों, ग्राम पंचायतों तथा अभिभावकों को संयुक्त बैठक करके छात्राओं और अभिभावकों को विश्वास में लेकर शिक्षा सत्र शुरू करना चाहिए। बाठ ने सुझाव दिया कि हरियाणा सरकार केरल सरकार का पैटर्न अपनाते हुए छात्राओं को उनके गांव के स्कूल में ही वीडियो कान्फ्रेंसिंग अथवा एजुसैट के माध्यम से भी पढ़ा सकती है।

 

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