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सातवीं के लड़के ने दी टीचर और बेटी को रेप की धमकी, दूसरे ने की कैंडल लाइट डेट-सेक्स की पेशकश

सातवीं के छात्र ने इंटरनेट पर एक ऑनलाइन पोस्ट के जरिये अपनी टीचर और उनकी बेटी का रेप करने धमकी दी है। उसी स्कूल के एक और छात्र ने टीचर को कैंडल लाइट डेट और शारीरिक संबंध बनाने के लिए पूछा।

इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दिल्ली से सटे गुरुग्राम के एक बड़े प्राइवेट स्कूल के एक सातवीं के छात्र ने इंटरनेट पर एक ऑनलाइन पोस्ट के जरिये अपनी टीचर और उनकी बेटी का रेप करने धमकी दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक टीचर की बेटी उसी कक्षा में पढ़ती है जिसमें आरोपी छात्र पढ़ता है। एक और मामले में उसी स्कूल के कक्षा आठ के एक छात्र ने टीचर को ईमेल करके उसके साथ कैंडल लाइट डेट पर जाने शारीरिक संबंध बनाने के लिए पूछा है। दोनों ही घटनाएं पिछले हफ्ते की हैं। रेप की धमकी मिलने के बाद टीचर तो स्कूल आ रही हैं, लेकिन उनके बेटी अब तक सदमे से नहीं उबर पाई है।

स्कूल की तरफ से इस घटना पर कहा गया है- ”इस घटना में लोअर मिडिल स्कूल के छात्र के शामिल होने की बात सामने आ रही है जो कि कथिततौर पर एक आक्रामक और अत्यधिक आपत्तिजनक साइबर शरारत में लिप्त है, जिसमें एक टीचर शामिल है। इस मामले की जांच के बाद सख्स कार्रवाई की गई जिसमें जरूरी काउंसलिंग और निलंबन भी किया गया। इस तरह के कृत्यों के लिए स्कूल में शून्य-सहनशीलता नीति है।”

लेकिन बाल कल्याण समित की अध्यक्ष शकुंतला ढुल ने कहा कि उन्होंने मामले को स्वत: संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि स्कूल और स्कूल के बच्चों को एक नोटिस भेजा जाएगा, उन्हें बुलाया जाएगा और पूरे मामले के बारे में पूछा जाएगा, टीचरों और बच्चों को मिलाकर स्कूल के अथॉरिटी के परामर्श सत्र चलाए जाएंगे। कई स्कूलों के प्रधानाचार्यों ने मीडिया से कहा कि यह एक स्कूल का मामला नहीं है, बल्कि एक बड़ी सामाजिक अस्वस्थता का हिस्सा है, माता-पिता को घर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

एचडीएफसी की प्रधानाचार्य अंकिता मक्कर ने टीओआई को बताया कि आज के बच्चों के हाथों में कई गैजेट होने के कारण वे आक्रामक हो जाते हैं, उन्हें नहीं पता होता है कि वे क्या देखना चाहते हैं और कौन सी साइट्स देख रहे हैं। एमिटी इंटरनेशनल की प्रधानाचार्य आरती चोपड़ा ने कहा कि घर में एकांत होने और किसी से बात न कर पाने के कारण बच्चे ठीक महसूस नहीं करते होंगे। यह उन बच्चों के मामले में ज्यादा होता है जो भावनात्मक रूप से मजबूत नहीं होते हैं, उनके माता-पिता उन पर सही तरीके से ध्यान नहीं देते हैं।

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