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रामपाल दो मामलों में बरी: दूध से नहाता था यह बाबा, उससे खीर बनवा कर भक्‍तों में बंटवाता था

रामपाल संत बनने से पहले हरियाणा के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था।

रामपाल पुलिस हिरासत में। (फाइल फोटो)

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के लिए 20 साल जेल की सजा मिलने के एक दिन बाद ही हरियाणा के एक दूसरे स्वयंभू संत रामपाल को स्थानीय अदालत से मामूली राहत मिली है। रामपाल को बंधक बनाने और सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने के आरोप से बरी कर दिया है लेकिन उस पर हत्या और राजद्रोह का मुकदमा जारी रहेगा। खुद को संत और कबीर का अवतार बताने वाला रामपाल  साल 2014 से ही जेल में है। साल 2006 में रामपाल के आर्य समाज से जुड़े विवाद के बाद उसके समर्थकों और आर्यसमाज के अनुयायियों में हिंसक झड़प में तीन लोग मारे गए थे। उस मामले में कई अन्य के साथ रामपाल को भी अभियुक्त बनाया गया था। रामपाल को साल 2008 में जमानत मिल गयी लेकिन साल 2014 में जब वो दर्जनों बार बुलाए जाने पर भी अदालत में हाजिर नहीं हुआ तो कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया। करीब दो हफ्ते के संघर्ष के बाद ही पुलिस नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार कर पायी। 67 वर्षीय रामपाल तब से ही जेल में था।

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हरियाणा के की जिलों में रामपाल का आश्रम है। पुलिस ने उसे रोहतक स्थित एक आश्रम से गिरफ्तार किया था। उसके प्रशंसकों ने गिरफ्तारी रोकने के लिए पुलिस का हिंसक विरोध किया था जिसमें छह लोग मारे गए और करीब दो सौ लोग घायल हो गये थे। रामपाल का जन्म 1951 में सोनीपत के धनाणा गांव में हुआ था। वो हरियाणा के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर था। उसका असली नाम रामपाल दास है। वो नौकरी के दौरान ही धार्मिक कार्यक्रमों और सत्संग-प्रवचन इत्यादि से जुड़ गया। धीरे-धीरे वो खुद को संत रामपाल के रूप में प्रचारित करने लगा। साल 2000 में उसने नौकरी से इस्तीफा देकर पूर्णकालिक रूप से बाबागिरी शुरू कर दी। उसने बरवाला में सतलोक आश्रम बनाया। कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि करीब 20 एकड़ में फैला यह आश्रण रामपाल ने कब्जे की जमीन पर बनाया है।

रामपाल खुद को दैवीय पुरुष के रूप में प्रचारित करता है और उसके अनुयायी भी उसे चमत्कारी पुरुष मानते हैं। साल 2014 रामपाल के मनोज नामक एक भक्त ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि रामपाल अपने आश्रण में गाय के दूध से नहाता था और बाद में उसी दूध से खीर बनाकर भक्तों में बांटी जाती थी। मनोज के अनुसार रामपाल के भक्त इस खीर को चमत्कारी मानते थे। हालांकि रामपाल के कुछ अन्य भक्त मनोज से थोड़ा अलग कहानी बताते हैं। रामपाल के एक भक्त कृष्णा ने 2014 में इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि रामपाल के आश्रम के हाल की छट में एक पाइप लगी है जिससे दूध नीचे टपकता है। रामपाल नीचे बैठा रहता है और उसके सिर पर बूंद-बूंद कर दूध गिरता है और बाद में उसी दूध से खीर बनायी जाती है और प्रसाद के रूप में बांटी जाती है।

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