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जाटों का कूच टला- केंद्र से मिला भरोसा सामान्य रहेंगी मेट्रो सेवाएं, फैसले से दिल्ली को बड़ी राहत

सीएम खट्टर ने कहा कि फैसलों के तहत हरियाणा सरकार प्रदर्शनकारियों पर 2010 से 2017 के बीच दर्ज मामलों का पुन: मूल्यांकन करेगी और जाटों को पूरा न्याय दिया जाएगा।

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआईजेएएसएस) के अध्यक्ष यशपाल मलिक

हरियाणा में जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर रविवार को दिनभर खासी गहमागहमी रही। एक तरफ अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी व मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के साथ बातचीत करके सोमवार को दिल्ली कूच स्थगित करने का भरोसा दिया वहीं फतेहाबाद में दिल्ली कूच करने से रोके जाने पर जाट उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस की दो बसों को आग के हवाले कर दिया। संघर्ष में एक एसपी, एक डीएसपी और 16 अन्य पुलिसकर्मियों समेत कम से कम 35 लोग घायल हो गए। गुस्साए जाटों ने कई मीडियाकर्मियों के कैमरे भी तोड़ डाले। आरक्षण की मांग कर रहे जाटों ने घोषणा की कि वे सोमवार को प्रस्तावित अपने कार्यक्रम के तहत दिल्ली कूच नहीं करेंगे। इस फैसले से राष्ट्रीय राजधानी को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के अधिकारियों ने सोमवार को राजधानी में लगने वाली पाबंदियों को वापस ले लिया। दिल्ली मेट्रो ने कहा कि उसकी सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी और केवल संसद भवन के आसपास के कुछ स्टेशनों से निकासी पर रोक रहेगी। जाट नेताओं से बातचीत के बाद खट्टर ने संवाददाता सम्मेलन में वादा किया कि जाटों को पूरा न्याय मिलेगा और उनकी मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आरक्षण देने की प्रक्रिया जल्द शुरू करेगी, वहीं राज्य स्तर पर, हाई कोर्ट का निर्णय आते ही जल्द कार्रवाई शुरू की जाएगी। खट्टर ने कहा कि फैसलों के तहत हरियाणा सरकार प्रदर्शनकारियों पर 2010 से 2017 के बीच दर्ज मामलों का पुन: मूल्यांकन करेगी और जाटों को पूरा न्याय दिया जाएगा।

खट्टर ने कहा, ‘इन प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों और विकलांग हुए लोगों को स्थाई नौकरियां दी जाएंगी। प्रदर्शन में घायल हुए लोगों को भी जल्द क्षतिपूर्ति दी जाएगी।’ उन्होंने कहा कि अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।खट्टर के साथ बैठे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआइजेएएसएस) के अध्यक्ष और आंदोलन के नेता यशपाल मलिक ने कहा, ‘हमने दिल्ली कूच के अपने कार्यक्रम और आंदोलन को रद्द कर दिया है। राज्य सरकार ने हमारी मांगें मान ली हैं। सोमवार को जाट दिल्ली नहीं आएंगे।’ उन्होंने कहा कि जाटों को सरकार पर पूरा भरोसा है। हालांकि उन्होंने कहा कि हरियाणा में कुछ जगहों पर धरने जारी रहेंगे क्योंकि हमें उन्हें फैसले के बारे में बताना है और इसमें पांच-छह दिन लग जाएंगे। मलिक ने कहा कि हम इसे 26 मार्च तक करेंगे। कुछ जगहों पर हमारी मांगें पूरी होने तक या कोई नया फैसला होने तक धरना सांकेतिक तरीके से होगा। इन धरनों में केवल हमारी समिति के सदस्य रहेंगे। हरियाणा के कई हिस्सों में 29 जनवरी से जाट धरने पर बैठे हैं।
मुख्यमंत्री खट्टर ने राज्य की जनता से शांति और भाईचारा बनाए रखने में सहयोग की अपील की। पिछले साल फरवरी में हरियाणा में जाटों के इसी तरह के आरक्षण आंदोलन ने बड़े स्तर पर हिंसा का रूप ले लिया था जिसमें करीब 30 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।जाट समुदाय के लोग आरक्षण के अलावा पिछले साल के अपने आंदोलन के दौरान जेल में बंद किए गए अपने लोगों की रिहाई की भी मांग कर रहे हैं। वे पिछले साल प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की और आंदोलन में भाग लेते हुए मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों को सरकारी नौकरी देने की भी मांग कर रहे हैं।

 

 

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