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जाट आंदोलन: आंदोलनकारियों ने दो बसें फूंकी

हिसार जिले के चामरखेड़ा और खीरी गांवों से जाट प्रदर्शनकारियों ने धानी गोपाल में धरना में शामिल होने के लिए फतेहाबाद जिले में घुसने की कोशिश की।

Author फतेहाबाद | March 20, 2017 12:51 AM
HC stays Haryana govt order on quota for Jatsजाट नेताओं की बैठक। (फाइल फोटो)

जाट प्रदर्शनकारियों को सोमवार को दिल्ली कूच करने से रोके जाने पर पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई, जिसमें एक एसपी और एक डीएसपी सहित 35 लोग घायल हो गए। घायलों में 18 पुलिसकर्मी हैं। प्रदर्शनकारियों ने सिरसा-हिसार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर धानी गोपाल गांव में हुई झड़प के दौरान पुलिस की दो बसों को भी आग के हवाले कर दिया। फतेहाबाद के पुलिस अधीक्षक ओपी नरवाल के हाथ में मामूली चोट लगी। उन्होंने बताया कि दो महिलाओं सहित 18 पुलिसकर्मी झड़प में घायल हो गए। उन्होंने बताया कि एक महिला सहायक उप निरीक्षक (एएसआइ) और एक महिला कांस्टेबल घायल पुलिसकर्मियों में शामिल हैं।  उन्होंने बताया, ‘तीन मीडियाकर्मियों को भी चोट लगी है। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर उन्हें कुछ देर के लिए बंधक बना लिया और उनके उपकरण तोड़ दिए।’ पुलिस ने जब आंसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लिया तब कुछ प्रदर्शनकारी भी घायल हो गए।

स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई, जब हिसार जिले के चामरखेड़ा और खीरी गांवों से जाट प्रदर्शनकारियों ने धानी गोपाल में धरना में शामिल होने के लिए फतेहाबाद जिले में घुसने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि जाट प्रदर्शनकारियों के साथ ट्रैक्टर ट्रॉलियों ने पुलिस अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश की। उनमें से कुछ कथित तौर पर लाठी भांज रहे थे। बैरियर पर तैनात किए गए डीएसपी गुरदयाल सिंह ने उनसे पैदल जाने और शांतिपूर्वक धरना देने की अपील की लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं झुके। प्रदर्शनकारी मीडियाकर्मियों से भी भिड़ गए। उन्होंने कथित तौर पर उनके मोबाइल फोन और अन्य उपकरण छीन लिए। उन्होंने इन लोगों के कैमरों से वीडियो और तस्वीरें कथित तौर पर मिटा दी। बाद में मीडियाकर्मियों ने पुलिस के पास एक शिकायत दर्ज करा कर जाट आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। एक संवाददाता ने बताया कि उसने भाग कर एक पुलिस बस में शरण ली। आंदोलनकारियों ने बस को आग के हवाले करने से पहले वाहन पर पथराव किया। उसने दावा किया कि जब वह किसी तरह से वहां बाहर निकल कर भागा तब प्रदर्शनकारियों ने उसे पकड़ लिया। उसे खेत में स्थित एक मकान में ले गए जहां उसकी पिटाई की। ग्रामीणों ने कुछ देर बाद उसे छुड़ाया। वहीं, एक जाट नेता ने दावा किया कि पुलिस ने उस वक्त आंसू गैस के गोले छोड़े और उन्हें तितर बितर करने की कोशिश की, जब वे लोग शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे थे।
 

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