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हरियाणा: कोरोना के बाद H5N8 वायरस से हड़कंप! मंत्री ने बताया- 1 महीने में 4 लाख मुर्गों की हो गई मौत

मंत्री ने यह भी बताया कि हरियाणा के पांच पोल्ट्री फॉर्म की मुर्गियों को मारने के लिए टीमें बना दी गयी है। इस दौरान करीब 1 लाख 60 हजार मुर्गियों को मारा जाएगा। साथ ही पोल्ट्री फॉर्म के कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच भी की जाएगी।

bird flu , haryana , india , chickenप्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट – PTI)

कोरोना महामारी के बीच देश में बर्ड फ्लू के मामले भी लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। गुजरात, मध्यप्रदेश , राजस्थान और केरल के बाद अब हरियाणा ने भी बर्ड फ्लू की पुष्टि कर दी है।  बर्ड फ्लू की जानकारी देते हुए राज्य के पशुपालन मंत्री जे पी दलाल ने कहा कि यहाँ एक महीने में करीब 4 लाख मुर्गों की मौत चुकी है। मंत्री ने बताया कि हरियाणा के दो पोल्ट्री फॉर्म में खतरनाक H5N8 वायरस भी मिला है।

पशुपालन मंत्री जे पी दलाल ने राज्य में फैले बर्ड फ्लू की जानकारी देते हुए कहा कि हमने राज्य के अलग अलग पोल्ट्री फॉर्म्स के सैम्पल जालंधर और भोपाल भी भेजे थे। सैम्पल जांच के परिणाम आने के बाद राज्य में आधिकारिक तौर पर बर्ड फ्लू की पुष्टि कर ली गयी है। साथ ही मंत्री ने यह भी बताया कि हरियाणा के पांच पोल्ट्री फॉर्म की मुर्गियों को मारने के लिए टीमें बना दी गयी है। इस दौरान करीब 1 लाख 60 हजार मुर्गियों को मारा जाएगा। साथ ही पोल्ट्री फॉर्म के कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच भी की जाएगी।

हरियाणा के पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी बर्ड फ्लू का प्रकोप काफी बढ़ रहा है। राजस्थान के झालावाड़ सहित कई अन्य इलाक़ो में पक्षियों के बड़े स्तर पर मरने की जानकारी मिल रही है। इसके अलावा राजस्थान में हर साल पहुँचने वाले प्रवासी पक्षियों पर भी बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ने की आशंका है।

केंद्र सरकार ने भी बर्ड फ्लू को लेकर राज्यों को एलर्ट जारी कर दिया हैं। साथ ही राज्य सरकारों से उन क्षेत्रों में प्रतिबंध भी लगाने को कहा गया है जहाँ पक्षियों की मौत के मामले सामने आये हैं। आपको जानकारी के लिए आपको बता दूँ कि जिन राज्यों में बर्ड फ्लू के सबसे ज्यादा मामले सामने आये हैं उनमें केरल बुरी तरह से प्रभावित है। केरल में पक्षियों के सैम्पल से एवियन इन्फ्लुएंजा भी मिले हैं।

दरअसल एवियन इन्फ्लूएंजा एक वायरस है जो खास तौर से पक्षियों के द्वारा फैलता है। यह बीमारी पक्षियों के बीच बहुत तेजी से फैलती है और अत्यंत घातक होती है। इस वायरस की पहचान पहली बार 1996 में चीन में की गई थी।

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