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रॉबर्ट वाड्रा सोनिया गांधी के दामाद हैं, वीआईपी हैं, ये सोच कर अफसरों ने बिना ज्यादा जांच के ही दे दिया था कॉलोनी बनाने का लाइसेंस

सूत्रों के अनुसर किसी भी कंपनी की निर्माण क्षमता का मूल्यांकन करना उसे कॉलोनी बनाने का लाइसेंस देने के लिए जरूरी सबसे महत्वपूर्ण मानकों में एक है।

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा। (पीटीआई फाइल फोटो)

साल 2008 में हरियाणा की भूपिंदर सिंह हुड्डा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी को गुड़गांव में कॉलोनी बनाने की इजाजत दी थी। जिन अधिकारियों को वाड्रा और उनकी कंपनी की कॉलोनी बनाने की क्षमता का मूल्यांकन करना था उन्होंने कंपनी के डायरेक्टर वाड्रा के सोनिया गांधी का दामाद और वीआईपी होने को वजह बताकर मान लिया था कि वो कॉलोनी बनाने में सक्षम हैं। रॉबर्ट वाड्रा सोनिया गांधी और राजीव गांधी की बेटी प्रियंका गांधी के पति हैं।

सूत्रों के अनुसार ये जानकारी सेवानिवृत्त जस्टिस एसएन धींगरा कमीशन के सामने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (डीटीसीपी) के अधिकारियों के बयान से सामने आई है। धींगरा कमीशन का गठन गुड़गांव में कॉलोनी बनाने की अनुमति देने में किसी तरह की अनियमितता की जांच करने के लिए किया गया था। कमीशन ने पिछले साल अगस्त में अपनी रिपोर्ट हरियाणा के मौजूदा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सौंपी थी।

हुड्डा ने धींगरा कमीशन की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि खट्टर ने राजनीतिक बदले की भावना की वजह से इस कमीशन का गठन किया है। धींगरा कमीशन की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन जस्टिस धींगरा ने यह कहते हुए इस मसले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया कि वो अपना काम कर चुके हैं और अब ये अदालत फैसला करेगी कि ये रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए या नहीं।

सूत्रों के अनुसर किसी भी कंपनी की निर्माण क्षमता का मूल्यांकन करना उसे कॉलोनी बनाने का लाइसेंस देने के लिए जरूरी सबसे महत्वपूर्ण मानकों में एक है। डीटीसीपी भूप्रयोग में बदलाव (सीएलयू) का प्रमाणपत्र भी जारी करता है। हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अरबन एरियाज एक्ट में सीएलयू के लिए आवेदन करने वाले का कॉलोनी निर्माण में सक्षम होना आवश्यक नहीं है। लेकिन कॉलोनी निर्माण की इजाजत के लिए इसकी क्षमता का होना कानूनन जरूरी है।

सूत्रों के अनुसार धींगरा कमीशन ने इस पहलू पर काफी बारीकी से छानबीन की है। सूत्रों के अनुसार डीटीसीपी के अधिकारियों ने धींगरा कमीशन को बताया कि स्काईलाइट की कॉलोनी निर्माण क्षमता का आकलन उसके डायरेक्टर (रॉबर्ट वाड्रा) की हैसियत के आधार पर किया गया था।

सूत्रों के अनुसार गुड़गांव के टाउन प्लानिंग अफसर ने धींगरा कमीशन से कहा कि वाड्रा चूंकि सोनिया गांधी के दामाद थे इसलिए वो वीआईपी थे और इसलिए वो कॉलोनी बनाने में सक्षम थे। सूत्रों के अनुसार बाद में ऊपर के अधिकारियों और आखिरकार राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा ने इस अफसर की रिपोर्ट को संस्तुति दी थी।

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