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गुरुग्राम नगर निगम: खट्टर ने जिन उम्मीदवारों के समर्थन में बैठकें कीं, वे चारों खाने चित हो गए

गुरुग्राम शहर के 35 वार्डों में से 21 पर भाजपा उम्मीदवारों की करारी शिकस्त के बाद अब खट्टर विरोधी खेमा और सक्रिय हो गया है।
Author संजीव शर्मा | September 26, 2017 02:16 am
हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर। (File Photo)

हरियाणा की आर्थिक राजधानी गुरुग्राम नगर निगम के चुनाव में भाजपा को मिली करारी हार ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस हार के बाद हरियाणा की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। चुनाव का एक अहम पहलू यह रहा कि भाजपा के दिग्गज नेताओं ने जिन-जिन वार्डों में अपना दम दिखाया वहीं-वहीं पार्टी उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है।  यहां तक कि मुख्यमंत्री खट्टर ने जिन उम्मीदवारों के समर्थन में बैठकें-रैलियां कीं, उन उम्मीदवारों ने चुनावी रण में पानी तक नहीं मांगा। खट्टर जिला शिकायत निवारण समिति के चेयरमैन भी हैं। इस चुनाव में गुरुग्राम के विधायक उमेश अग्रवाल, लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह, गौसेवा आयोग के चेयरमैन भानी राम मंगला, मुख्यमंत्री की सलाहकार टीम में सबसे अग्रणी रहने वाले हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता ऐसे हैं जिनकी छवि तो प्रदेश स्तरीय नेताओं की है लेकिन इस चुनाव में वे अपना गढ़ भी नहीं बचा सके। गुरुग्राम शहर के 35 वार्डों में से 21 पर भाजपा उम्मीदवारों की करारी शिकस्त के बाद अब खट्टर विरोधी खेमा और सक्रिय हो गया है। खुद सरकार के ही मंत्रियों व भाजपा दिग्गजों ने पहले ही दिन से निगम चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ा हुआ था।

निगम चुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों का ट्रेलर तक बताया गया और अब हार के बाद भाजपा नेता निर्दलीय पार्षदों को ही भाजपा समर्थित बताकर अपनी लाज बचाने में जुट गए हैं। देश में ‘आया राम गया राम’ की राजनीति के लिए मशहूर हरियाणा में फिर से भले ही जोड़-तोड़ से निगम में सत्तारूढ़ भाजपा मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर बनाने में सफल हो जाए, पर इस चुनाव ने विकास, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दों की पूरी तरह से हवा निकाल दी है। निगम चुनावों में दो धड़े आमने-सामने थे। इनमें एक का नेतृत्व तो गुरुग्राम से सांसद व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ही कर रहे थे और दूसरे की कमान अप्रत्यक्ष तौर पर खुद मुख्यमंत्री ने संभाली हुई थी। मुख्यमंत्री के खासमखास मंत्रियों में से एक राव नरबीर सिंह, हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन जवाहर यादव व डेयरी विकास प्रसंघ के चेयरमैन जीएल शर्मा ने जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया हुआ था। खुद सीएम ने कई उम्मीदवारों के लिए गुरुग्राम में बैठकों का भी आयोजन किया था।

हरियाणा गौसेवा आयोग के चेयरमैन भानीराम मंगला अपने ही बेटे प्रमोद मंगला को नहीं जिता सके। मंगला की गिनती मुख्यमंत्री के नजदीकियों में होती है। हैरानी यह है कि उनके बेटे ने जिस वार्ड से चुनाव लड़ा, खट्टर कैबिनेट में दिग्गज मंत्री राव नरबीर सिंह, विधानसभा में डिप्टी स्पीकर संतोष यादव, संघ के सह-सरचालक पवन जिंदल, वीटा प्रसंघ के चेयरमैन जीएल शर्मा, व्यावसायिक प्रकोष्ठ के संयोजक सतीश खोला सहित पार्टी के कई दिग्गज यहां रहते हैं। इसके बावजूद प्रमोद को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। वार्ड 17 से चुनाव लड़ रहीं गीता तंवर को मुख्यमंत्री खेमे की ओर से एक तरह से नगर निगम मेयर का उम्मीदवार घोषित किया हुआ था। खुद मुख्यमंत्री खेमे की ओर से ने भी उनके लिए बैठक की थी और कैबिनेट मंत्री राव नरबीर ने इस वार्ड में डेरा डाले रखा, इसके बावजूद निर्दलीय प्रत्याशी रजनी के हाथों गीता तंवर शिकस्त खा गर्इं।  वार्ड-15 से भाजपा उम्मीदवार मनोज भारद्वाज के लिए मुख्यमंत्री का प्रचार भी काम नहीं आया। मुख्यमंत्री ने तो भारद्वाज के लिए गुरुगाम गेस्ट हाउस में एक समाज विशेष के लोगों की बैठक तक ली थी। लेकिन बात नहीं बन पाई।

 

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