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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017: योगगुरु बाबा रामदेव के पैतृक गांव में शवासन कर रहा है योग

International Yoga Day 2017: दुनिया भर को योग का संदेश देने वाले रामदेव के पैतृक गांव सैदअलीपुर में योग को लेकर कोई जागरूकता नहीं है।

Author चंडीगढ़ | June 21, 2017 1:54 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बाबा रामदेव। (Source: PTI)

संजीव शर्मा

योगगुरु बाबा रामदेव का नाम अब देश-विदेश में अनजाना नहीं है। योग जब शवासन में लेटा था, रामदेव ने शीर्षासन किया और तब फिर से योग को जीवन मिला और वह देश-दुनिया को नया जीवन देने लगा। इसका महत्त्व ऐसे सिर चढ़ कर बोला कि संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दी। दिलचस्प यह है कि दुनिया भर को योग का संदेश देने वाले रामदेव के पैतृक गांव सैदअलीपुर में योग को लेकर कोई जागरूकता नहीं है। जनसत्ता ने हरियाणा-राजस्थान सीमा पर बसे इस गांव का 20 जून को दौरा किया। सुबह के सात बज रहे थे। गांव में कोई पानी ढो रहा था, तो कोई खेत में हल जोत रहा था। महिलाएं पशुओं का गोहा-कूड़ा संभालने में व्यस्त थीं। बच्चे और कुछ युवा खेतों में ही डंडे गाड़ कर क्रिकेट खेल रहे थे। इन्हीं खिलाड़ियों में से एक से पूछ लिया कि बाबा रामदेव तो आपके ही गांव के हैं न, आप सुबह योग नहीं करते? जवाब सुधीर ने दिया। उसने कहा कि हैं इसी गांव के, पर होश संभालने के बाद से अब तक मैंने रामदेव को अपने गांव में नहीं देखा। सुधीर की बात पर यकीन करें तो पिछले साल जब पूरे देश में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम हुए, तब भी उनके गांव में योग को लेकर कोई सुगबुगाहट नहीं हुई।

क्रिकेट खेल रहा एक दूसरा बच्चा राहुल कहता है कि वह अपने माता-पिता के साथ सुबह सैर तो कर लेता है, पर उसने नियमित रूप से कभी योग नहीं किया।
इसी गांव के युवा कृष्ण कुमार कहते हैं ‘ग्रामीण परिवेश के लोगों को योग आदि की कोई नियमित आदत नहीं होती है। यहां सुबह उठते ही लोग अपने कामकाज में जुट जाते हैं, यही उनके लिए व्यायाम है’। यह पूछने पर कि क्या बाबा रामदेव की संस्था ने यहां कभी योग को लेकर कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया? कृष्ण कुमार कहते हैं ‘मेरी याद से तो आज तक कोईअभियान नहीं चलाया गया और न ही कोई प्रबंध किया गया’। गांव के पूर्व सरपंच मान सिंह से योग को लेकर पूछा गया। उनके अनुसार, 2007-08 के दौरान नांगल चौधरी में आयोजित योग शिविर में जब रामदेव शामिल हुए थे तो वे अपने गांव भी आए थे। उसके बाद दोबारा वे यहां नहीं आए। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि समूचे विश्व को योग का पाठ पढ़ाने वाले रामदेव ने योग को लेकर कभी अपने पैतृक गांव की सुध नहीं ली। उनकी ओर से गांव के लोगों को जागरूक करने की कोई कोशिश नहीं हुई। हालांकि गांव में अधिकतर लोग यह चाहते हैं कि यहां सुबह योग प्रशिक्षण के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए, लेकिन गांव के किसी भी व्यक्ति का उनके संस्थान के साथ सीधा संपर्क नहीं है, जिसके चलते यहां आज तक योग कक्षा शुरू नहीं हो सकी है।

पढ़ाई की कसरत में कमजोर थे रामदेव

पढ़ाई की कसरत में कमजोर थे रामदेव
गांव सैदअलीपुर में आज भी ऐसे लोग मिल जाते हैं जो रामकृष्ण यादव (अब रामदेव) के बचपन के सहपाठी रहे हैं। गांव की परमेश्वरी देवी (75) के मुताबिक, कृष्ण उनके लड़के विनोद के सहपाठी रहे हैं। कृष्ण का मन पढ़ाई में ज्यादा नहीं लगता था। आठवीं में फेल होने के बाद घरवालों ने उसे पीटा था। इसके बाद वह घर से भाग कर गुरुकुल में भर्ती हो गए, जहां उन्होंने आगे की शिक्षा हासिल की।

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