ताज़ा खबर
 

हाई-फाई गुरुग्राम में 5 महीने में 52 बलात्‍कार, कुछ नहीं कर पा रही भाजपा की मनोहर लाल खट्टटर सरकार

गुरुग्राम के एक पुलिसकर्मी पर करीब 650 लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। इनमें एसीपी, डीसीपी और अन्य उच्च पदादिकारी भी शामिल हैं।
गुरुग्राम की सड़क पर गुजरती एक महिला हाथों में मोबाइल को देखती हुई। REUTERS/Adnan Abidi/File Photo

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार सूबे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नाकाम रही है। देश की राजधानी नई दिल्ली से सटे साइबर सिटी और राष्ट्रीय राजधानी का हिस्सा गुरुग्राम में अपराध के आंकड़े दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। अपराधियों के हौसले में भी दिनोदिन बुलंद हो रहे हैं। इसकी तस्दीक करती है पुलिस थानों में दर्ज रिकॉर्ड्स। इस साल जनवरी से 2 जून तक गुरुग्राम में कुल 53 दुष्कर्म की वारदात हो चुकी हैं। इनमें से 9 गैंगरेप की घटना है। इसके अलावा इस शहर में छेड़छाड़ की अब तक 100 से ज्यादा केस रजिस्टर्ड हुए हैं। पोस्को के तहत भी 45 मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले दिनों 19 वर्षीय महिला के साथ मानेसर में हुए गैंगरेप की वारदात और आठ महीने की उसकी बच्ची की पटककर हत्या से शहर सन्न है और सदमे में है। हालांकि खट्टर सरकार अक्सर शहर में शांति व्यवस्था की बात करती है।

गुरुग्राम की आबादी आज की तारीख में एक अनुमान के मुताबिक करीब 25 लाख है और गुरुग्राम पुलिस में पुलिसकर्मियों और अधिकारयों की कुल संख्या 3767 है। यानी गुरुग्राम के एक पुलिसकर्मी पर करीब 650 लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। इनमें एसीपी, डीसीपी और अन्य उच्च पदादिकारी भी शामिल हैं। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुरुग्राम में रह रहे लोगों की सुरक्षा कितनी पुख्ता है। दिल्ली में पुलिस पब्लिक अनुपात 1:256 है जबकि राष्ट्रीय तौर पर यह अनुपात 1:554 है।

गुरुग्राम में रहने वाले लोगों की शिकायत है कि शहर दिन-ब-दिन आकार और आबादी के लिहाज से बढ़ रहा है लेकिन उस अनुपात में पुलिस की संख्या नहीं बढ़ रही है। बढ़ते अपराध पर काबू पाने के लिए न सिर्फ पुलिस बल को बढ़ाने की मांग हो रही है बल्कि पुलिस की कार्यशैली को भी बदलने की मांग हो रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रेखा शर्मा ने गुरुग्राम में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता जताई है और राज्य सरकार से गुरुग्राम में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की मांग की है।

इनके अलावा गुरुग्राम की सड़कों पर बेतरतीव वाहनों की भीड़, सरकारी परिवहन प्रणाली की कमी, सड़कों और रिहायशी इलाकों में सुरक्षाकर्मियों की पेट्रोलिंग की कमी, प्रमुख सड़कों, चौक-चौराहों पर लाइट की कमी की वजह से भी अपराधियों में खौफ का माहौल नहीं है और वे अपराध को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.