हरियाणा में इस महीने की शुरुआत में मजदूरों ने वेतन बढ़ाने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। बड़े स्तर पर हुए इस विरोध-प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार को न्यूनतम वेतन बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। इसके बावजूद, श्रमिक संगठन अब और ज्यादा वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन उस राशि से काफी कम है जिस पर पिछले साल श्रमिक संगठनों और उद्योग के प्रतिनिधियों वाले एक पैनल ने सहमति जताई थी। इसके अलावा यह वेतन भारत में कामकाजी वयस्कों की पोषण की पर्याप्त जरूरतों को भी पूरा नहीं करता।
आपको बता दें कि यह प्रस्तावित राशि 23,196 रुपये प्रति माह है। आइए जानते हैं इस संशोधित आंकड़े के पीछे की कैलकुलेशन की वजह…
न्यूनतम वेतन की मांग
हरियाणा में हड़तालों के पीछे प्रमुख श्रमिक संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU – सीटू) के हरियाणा चैप्टर के महासचिव जय भगवान ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 29 दिसंबर 2025 को राज्य न्यूनतम वेतन समिति ने सर्वसम्मति से 23,196 रुपये प्रति माह का न्यूनतम वेतन की सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि समिति ने अपनी सिफारिश राज्य सरकार को भेज दी थी।
हालांकि, जब हरियाणा ने इस महीने की शुरुआत में संशोधित न्यूनतम वेतन दरों की घोषणा की तो इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया। यह फैसला राज्य में बड़े स्तर पर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद लिया गया खासकर ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब मानेसर में। इन प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं सहित 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मजदूरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
9 अप्रैल को हरियाणा ने न्यूनतम वेतन में संशोधन किया था। इससे पहले वेतन में आखिरी बार संशोधन अक्टूबर 2015 में हुआ था। अब हरियाणा में अकुशल (unskilled) श्रमिकों के लिए बेसिक मासिक न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 15,220.71 रुपये कर दिया गया है जबकि उच्च कुशल (highly skilled) श्रमिकों के लिए यह 19,442.85 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
संविदा (contractual) श्रमिकों पर लागू होने वाले दैनिक वेतन को अकुशल श्रमिकों के लिए 582.4 रुपये प्रति दिन और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए 747.14 रुपये प्रति दिन निर्धारित किया गया है। जय भगवान ने कहा कि यह वेतन वृद्धि श्रमिकों की अपेक्षाओं से काफी कम है।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण बढ़ती महंगाई ने राज्य में न्यूमतम वेतन पा रहे मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। युद्ध से गैस सिलेंडरों की कमी भी हो गई है जो कई मजदूरों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। जय भगवान ने बताया कि कई मजदूरों को काला बाज़ार से ऊंची कीमतों पर गैस सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। इसके अलावा, रोज़मर्रा की अन्य चीज़ों- जैसे उनके नियमित खाने-पीने के जगहों पर भोजन की कीमतें भी बढ़ गई हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कठिन हो गई है।
कैसे हुई न्यूनतम वेतन की कैलकुलेशन?
समिति ने 23,196 रुपये प्रति माह के आंकड़े तक पहुंचने के लिए विस्तार से कैलकुलेशन की। इसमें एक महीने की अवधि के दौरान जरूरी पोषक तत्वों और कपड़ों की कीमतों का आकलन शामिल था। इसके अलावा किराया, बिजली, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च आदि जैसे जरूरी खर्चों को भी ध्यान में रखा गया।
जानें इन चीजों की नीचे दी गईं डिटेल्स
| सीरियल नंबर | सामान | प्रतिदिन | यूनिट | प्रतिमाह | यूनिट | कीमत/यूनिट (₹) | खर्च (₹) |
| 1 | अनाज | 396.89 | ग्राम | 35.72 | किलोग्राम | 32.73 | 1169.12 |
| 2 | दालें (मसालों सहित) | 85.05 | ग्राम | 7.65 | किलोग्राम | 181.69 | 1389.93 |
| 3 | सब्जियां | 283.5 | ग्राम | 25.51 | किलोग्राम | 78.07 | 1991.57 |
| 4 | दूध | 295.74 | मिलीलीटर | 26.62 | लीटर | 68.37 | 1820.01 |
| 5 | चीनी और गुड़ | 56.7 | ग्राम | 5.1 | किलोग्राम | 54.24 | 276.62 |
| 6 | तेल और घी | 59.15 | मिलीलीटर | 5.32 | लीटर | 212.11 | 1128.43 |
| 7 | फल | 56.7 | ग्राम | 5.1 | किलोग्राम | 166.88 | 851.09 |
| 8 | मछली और मांस | 85.05 | ग्राम | 7.65 | किलोग्राम | 399.19 | 3053.8 |
| 9 | अंडे | 1 | नंबर | 90 | नंबर | 7.53 | 661.5 |
| 10 | कपड़े | – | – | 5.5 | मीटर | 351.42 | 1932.81 |
| कुल (1+10) [खाना और कपड़े] | 14274.88 | ||||||
| 11 | घर (किराया- भोजन और कपड़ों के खर्च का 10% है) | 1427.49 | |||||
| 12 | ईंधन, बिजली, और अन्य खर्चे (भोजन और वस्त्र व्यय का 20%) | 2854.98 | |||||
| 13 | बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा जरूरतें, मनोरंजन, अचानक होने वाले खर्च(कुल न्यूनतम वेतन का 25%) | 4639.34 | |||||
| Total | 23196.68 | ||||||
उपरोक्त सभी कीमतें 24 अप्रैल से 25 मार्च 2025 के बीच अंबाला, बहादुरगढ़, हिसार, पानीपत, रेवाड़ी और सोनीपत से इकट्ठा किए गए आंकड़ों के औसत पर आधारित हैं।
मजदूरों की हड़ताल की टाइमलाइन
इस साल पहला बड़ा श्रमिक आंदोलन फरवरी में बिहार के बरौनी में देखने को मिला था। वहां मजदूरों ने न्यूनतम वेतन संशोधन, कार्य समय को 8 घंटे प्रतिदिन तय करने और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं- जैसे भविष्य निधि (Provident Fund) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के तहत कवरेज की मांग उठाई थी।
इसी तरह के विरोध प्रदर्शन अन्य रिफाइनरियों में भी देखने को मिले। 23 फरवरी को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की पानीपत रिफाइनरी में कम से कम 30,000 संविदा श्रमिकों ने बेहतर वेतन और कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन हिंसक हो गया जहां गुस्साए मजदूरों ने सुरक्षा कर्मियों पर पथराव किया और उनके वाहनों में तोड़फोड़ की।
कुछ दिनों बाद, 27 फरवरी को लार्सेन एंड टर्बो (L&T) के लगभग 5,000 संविदा श्रमिकों ने आर्सेलर मित्तल निप्पो स्टील (AM/NS) के प्रोजेक्ट साइट, हज़ारिया (सूरत) में विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन भी हिंसक हो गया जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया।
सोमवार को यूपी के नोएडा में श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर बवाल हुआ जिससे कई इलाकों में जाम लग गया। कुछ स्थानों पर हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आईं जिसके कारण पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। वहां भी मुख्य मांग न्यूनतम वेतन बढ़ाने की ही है।
योगी सरकार ने गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन में लगभग 21% की अंतरिम वृद्धि को मंजूरी दी है। हालांकि, CITU ने मांग की है कि न्यूनतम वेतन दिल्ली और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में समान होना चाहिए। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों का न्यूनतम वेतन अब 13,690 रुपये है जबकि हरियाणा में इसी श्रेणी के श्रमिकों के लिए यह 15,220.71 रुपये है।
इस साल की शुरुआत से ही औद्योगिक क्षेत्रों के मजदूरों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं जो ऊर्जा संकट गहराने से पहले ही शुरू हो गए थे। यह संकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद और बढ़ गया जो Iran से जुड़े युद्ध के कारण प्रभावित हुआ।
एलपीजी सिलेंडरों की कमी और बढ़ती महंगाई के कारण मार्च से सूरत, मानेसर और नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आ रही हैं।
