हरियाणा के किसान अब अपनी खेती को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार की पहल से तंजानिया में खेती के अवसर तेजी से खुल रहे हैं, जिससे किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं। करीब तीन साल पहले, तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ‘गो ग्लोबल’ विजन के तहत इस योजना की शुरुआत हुई थी। इसी सोच के साथ हरियाणा में ‘डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन कोऑपरेशन’ बनाया गया, ताकि विदेशों के साथ साझेदारी को बढ़ाया जा सके। अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी इस पहल को आगे बढ़ा रहे हैं और तंजानिया के साथ बड़े स्तर पर कृषि सहयोग पर काम कर रहे हैं।

सरकार ने तंजानिया में करीब एक लाख एकड़ जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, जमीन के कागजात की पूरी जांच कराई जाएगी, ताकि किसानों को भविष्य में कोई परेशानी न हो। साथ ही, इस सहयोग को औपचारिक बनाने के लिए तंजानिया सरकार के साथ समझौता (MoU) करने की भी योजना है।

तंजानिया को चुनने के पीछे कई वजहें हैं। वहां की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और सस्ती जमीन। साथ ही, हिंद महासागर के किनारे होने से वहां से फसलों का निर्यात भारत और अन्य देशों तक आसानी से किया जा सकता है।

भिवानी के किसान सोमवीर घसोला पहले ही तंजानिया में 65 एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर ले चुके हैं। उन्होंने करीब 1.5 करोड़ रुपये निवेश किए। उनका कहना है कि हरियाणा में एक एकड़ जमीन 25 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की होती है, जबकि तंजानिया में 25 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ में 99 साल की लीज मिल जाती है। यानी 50 लाख रुपये में 100 एकड़ तक जमीन लेकर खेती की जा सकती है।

घसोला ने वहां मक्का, धान, गन्ना और बागवानी फसलों की संभावनाएं देखी हैं। खासकर काजू की गुणवत्ता उन्हें बेहद बेहतर लगी। उनका मानना है कि हरियाणा के किसानों की आधुनिक तकनीक, सिंचाई व्यवस्था और बेहतर बीजों से वहां उत्पादन काफी बढ़ सकता है।

यमुनानगर के उद्यमी शिव कुमार कंबोज ने भी तंजानिया में 20 एकड़ में फैक्ट्री लगाई है, जहां यूकेलिप्टस लकड़ी से कोर वेनियर बनाया जाता है। उनकी यूनिट में करीब 50 लोग काम कर रहे हैं और अब तक 1500 टन उत्पादन हो चुका है।

इस साल फरीदाबाद के सूरजकुंड में हरियाणा-अफ्रीका स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप मीटिंग भी आयोजित की गई, जिसमें बड़े स्तर पर निवेश और साझेदारी पर चर्चा हुई। इसी दौरान मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि अफ्रीका के साथ हरियाणा का रिश्ता सिर्फ ‘बिजनेस टू बिजनेस’ नहीं, बल्कि ‘दिल से दिल’ का है।

उन्होंने यह भी बताया कि तंजानिया के अलावा केन्या, युगांडा, इथियोपिया और रवांडा के साथ भी कृषि, प्रशिक्षण और तकनीकी साझेदारी की बड़ी संभावनाएं हैं। आगे की योजना के तहत 5 जुलाई से हरियाणा का एक प्रतिनिधिमंडल तंजानिया जाएगा, जहां वह दार-एस-सलाम इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में हिस्सा लेगा। इस पूरी पहल से साफ है कि सरकार की मदद से हरियाणा के किसान अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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भारतीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का मूल ढांचा पूरी तरह से कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र में व्यापक जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिला है। रोजगार और बेहतर आजीविका की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से पुरुषों का शहरों की ओर पलायन तेजी से बढ़ा है। इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नई परिस्थिति को जन्म दिया है। आज खेत तैयार करने से लेकर बीज रोपने, निराई-गुड़ाई, कटाई और अनाज के सुरक्षित भंडारण तक के मामले में अच्छे-खासे अनुपात में जिम्मेदारी महिलाओं ने अपने कंधों पर ली है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक