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हरियाणाः पढ़ाने-लिखाने के साथ प्रसाद बांटने में लगे मास्टरजी

हरियाणा की भाजपा सरकार को गुरुजनों की महत्ता अब समझ में आई है। सरकार ने बुधवार से शुरू हुए कपालमोचन मेले में शिक्षकों की ड्यूटी मंदिर का प्रसाद बांटने में लगा दी है।

Author चंडीगढ़ | November 2, 2017 1:39 AM
शिक्षक जवाहर यादव

हरियाणा की भाजपा सरकार को गुरुजनों की महत्ता अब समझ में आई है। सरकार ने बुधवार से शुरू हुए कपालमोचन मेले में शिक्षकों की ड्यूटी मंदिर का प्रसाद बांटने में लगा दी है। इसके अलावा शिक्षकों की अन्य कामों में भी ड्यूटी लगाई गई है। कुल 109 शिक्षकों की 30 अक्तूबर से यहां तैनाती की गई है।
सरकार के इस कदम का शिक्षकों और उनसे जुड़े संगठनों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि मेले में ड्यूटी लगा दी गई है और उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जा रही। वहीं अब मामला तूल पकड़ रहा है। पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसे स्थानीय प्रशासन का मामला बता कर पल्ला झाड़ लिया है।
गौरतलब है कि यमुनानगर के बिलासपुर में हर साल ऐतिहासिक कपालमोचन मेला लगता है। पर खास बात यह है कि यहां अलग-अलग व्यवस्था के कामों में 109 शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।

इन शिक्षकों को प्रशासन की ओर से कोई सुविधा मुहैया नहीं करवाई जा रही है। उनका कहना है कि वे 30 अक्तूबर से मेला स्थित मंदिरों घाटों पर ड्यूटी दे रहे हैं। प्रशासन की ओर से उनके खाने-पीने रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वे शिक्षक हैं, लेकिन प्रसाद बांटने के काम में लगा दिया। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें मंदिरों-घाटों में दानपात्र की देखरेख के लिए लगाया जाता है। श्राइन बोर्ड के पास 11 पुजारी हैं। इस कारण शिक्षकों को प्रसाद बांटना पड़ रहा है।

इस बीच प्रशासन की कार्यशैली की हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ ने कड़ी निंदा की है। हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के जिला प्रधान गुरमीत सिंह ने बताया कि प्रशासन हर साल अध्यापकों को मेला ड्यूटी पर लगाता है। यहां तक कि आदिबद्री, मां मंत्रा देवी केदारनाथ मंदिर में भी उनकी ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन उनको कोई सुविधा नहीं दी जाती। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप सरीन ने कहा कि एक तो शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लिए जा रहे हैं, दूसरे उनकी सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखता। यह निंदनीय है।

वहीं इस मामले पर खट्टर ने मामले को ‘लोकल एडमिनिस्ट्रेशन’ का बताया है। उनका कहना है कि हरियाणा बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
सरकार ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है। सरकार की तरफ से जवाहर यादव ने बयान देते हुए कहा कि मास्टरों को प्रसाद बांटने का काम जरूर दिया गया है। लेकिन उन्हें कोई पूजापाठ या पुजारी का काम नहीं दिया गया है। अध्यापक संघ का कहना है उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता शिक्षा देना है। हमारे कंधों पर देश का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि फिर स्कूलों में वैसे ही कई कमियां हैं, शिक्षा और विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं। इसकी वजह है अध्यापकों पर कई गैरशिक्षण कामों का थोपा जाना। दूसरी ओर प्रशासन ने शिक्षकों के इस विरोध पर उनको नोटिस थमाया।

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