हरियाणा के अंबाला जिले के धनौरा गांव में मंगलवार को चार साल का एक लड़का 220 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया जिसे निकालने की कोशिशें जारी हैं। इस घटना से लगभग दो दशक पहले कुरुक्षेत्र के हल्दाहेरी गांव में चार साल का बच्चा प्रिंस भी खुले बोरवेल में गिर गया था जिसे दो दिन बाद बाहर निकाला जा सका था। सेना के नेतृत्व में प्रिंस को बचाने के लिए साल 2006 में 50 घंटे से लंबा अभियान चलाया गया था जिसने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं थी।
प्रिंस अब 24 साल के हैं और उस भयावह घटना को याद करते हुए कहते हैं कि मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं बच गया। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “23 जुलाई 2006 को, मैं और मेरा दोस्त अंग्रेज अपने गांव के बोरवेल के पास खेल रहे थे। बोरवेल जूट की बोरी से ढका हुआ था जो हमारे कूदने पर खिसक गई। अंग्रेज ने तो अपना संतुलन बनाए रखा लेकिन मैं बोरवेल में गिर गया। हालांकि, उस समय मैं बहुत छोटा था लेकिन बचाव अभियान के वीडियो और तस्वीरें देखकर वो यादें मुझे सताती हैं। मुझे 25 जुलाई की सुबह बचाया गया जो मेरा जन्मदिन भी है। आज मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मैं बच गया।”
प्रिंस अब प्लंबर का काम करते हैं
प्रिंस ने हाल ही में आईटीआई से डिप्लोमा पूरा किया है और अब वे प्लंबर का काम करते हैं। इस पेशे को चुनने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने जवाब दिया, “मैंने सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो सका। मैंने सेना में भर्ती होने की कोशिश की लेकिन मेरी लंबाई तय मानकों से कम थी। फिर किसी ने मुझे आईटीआई से डिप्लोमा करने की सलाह दी। मैंने इसे हाल ही में पूरा किया है। आजकल मैं एक नौकरी की तलाश में हूं। फिलहाल मैं एक अस्पताल में प्लंबर के रूप में इंटर्नशिप कर रहा हूं।” प्रिंस के पिता राम चंद्र एक निजी कंपनी में काम करते हैं और उनकी सौतेली मां ममता गृहिणी हैं।
प्रिंस ने कहा, “मुझे धनौरा गांव में रहने वाले मेरे दोस्तों का फोन आया। उन्होंने मुझे बताया कि एक चार साल का बच्चा बोरवेल में गिर गया है। यह खबर सुनकर मुझे अपनी ही घटना याद आ गई। मैं भगवान से प्रार्थना कर रहा हूं कि यह बच्चा भी मेरी तरह बच जाए।” उन्होंने बताया कि वह अपने गांव और आसपास के इलाकों में जागरूकता फैला रहे हैं, लोगों से खुले बोरवेल को बंद करने का अनुरोध कर रहे हैं और बच्चों को उनके पास न जाने की चेतावनी दे रहे हैं।
प्रिंस को कैसे बचाया गया था?
50 घंटे के संघर्ष के बाद प्रिंस को 60 फुट गहरे बोरवेल से सफलतापूर्वक बचा लिया गया था। शुरुआती प्रयासों के फेल होने के बाद अंबाला स्थित सेना की खार्गा कोर ने अभियान शुरू किया था। भूस्खलन के खतरे को देखते हुए इंजीनियरों ने एक गहरी समानांतर सुरंग खोदने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया था। फंसे हुए बच्चे की सुरक्षा के लिए बचावकर्मी लगातार ऑक्सीजन पंप करते रहे और रस्सियों की मदद से दूध, चॉकलेट नीचे भेज रहे थे।
60 फुट की गहराई तक पहुंचने के बाद बचाव दल ने क्षैतिज सुरंग खोदने में 13 घंटे की कठिन मेहनत की। इसके बाद कैप्टन पंकज उपाध्याय संकरे रास्ते से रेंगते हुए निकले और प्रिंस को उसके पांचवे जन्मदिन पर सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस सफल अभियान के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था।
220 फुट गहरे बोरवेल में गिरा निर्भय
अंबाला के धनौरा गांव में 4 साल का निर्भय अपने पिता के साथ खेत में अपने दादा के लिए खाना लेकर गया था। खेलते समय निर्भय का पैर फिसल गया और वह खुले बोरवेल में जा गिरा। सूचना मिलते ही डीसी अजय सिंह तोमर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान शुरू कर दिया है। डीसी तोमर ने बताया कि यह घटना सुबह करीब 6.30 बजे हुई। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान लगातार जारी है।
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छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के खारवे गांव में (जिसकी आबादी 1,000 है) पिछले पांच महीनों में आठ मौतें हुईं। उन सभी में एक बात सामान्य थी वे सभी रामसहाय जायसवाल के साथ शराब पीने गए थे। रामसहाय एक लोकल किराने की दुकान का मालिक था जिसे 22 जून को सभी 8 लोगों की मौत के लिए गिरफ्तार किया गया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
