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हरियाणाः कोख के अंदर ही नहीं बाहर भी असुरक्षित महिलाएं

हरियाणा में पिछले करीब दस दिनों में दुष्कर्म व हत्या की एक दर्जन से अधिक घटनाओं ने जहां महिला सुरक्षा पर सवाल खडे़ कर दिए हैं वहीं प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली एक बार फिर से कठघरे में खड़ी हो गई है।

Author चंडीगढ़ | January 24, 2018 01:55 am
हरियाणा सरकार द्वारा महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर काबू पाने के लिए भले ही प्रदेश के सभी जिलों में महिला पुलिस थानों की स्थापना की गई है लेकिन धरातल पर आज भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है।

संजीव शर्मा

हरियाणा में पिछले करीब दस दिनों में दुष्कर्म व हत्या की एक दर्जन से अधिक घटनाओं ने जहां महिला सुरक्षा पर सवाल खडे़ कर दिए हैं वहीं प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली एक बार फिर से कठघरे में खड़ी हो गई है। हरियाणा में सरकार भले ही किसी भी पार्टी की क्यों न रही हो, प्रदेश में महिला उत्पीड़न एवं लड़कियों के साथ बलात्कार व हत्या की घटनाएं कभी नहीं थमी हैं। सूबे में पुलिस थानों और महिला आयोग के पास महिला उत्पीड़न की घटनाओं से संबंधित शिकायतें लगातार आ रही हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य महिला आयोग के पास यौन शोषण से लेकर गृह क्लेश, छेड़छाड़, प्रेम विवाह करके धोखाधड़ी से संबंधित करीब तीन हजार से अधिक शिकायतें पहुंच चुकी हैं।

आयोग ने 3100 शिकायतों पर सुनवाई तो की लेकिन निपटारा सिर्फ 1313 का ही किया जा सका। 1787 ऐसी शिकायतें है जिनका निपटारा तीन सालों में नहीं किया जा सका है। महिला आयोग के पास सबसे ज्यादा मामले पारिवारिक उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, और रिश्तेदारों की छेड़छाड़ से संबंधित हैं। आयोग के पास महिलाओं ने रिश्तेदारों या पारिवारिक सदस्यों की ओर से दुराचार व दुष्कर्म संबंधी शिकायतें सबसे ज्यादा दी हैं।

महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार गुरुग्राम ऐसे जिले के रूप में सामने आया है जहां महिलाओं का सबसे ज्यादा यौन उत्पीड़न किया जाता है। वर्ष 2015-2016 में आयोग के पास गुरुग्राम से यौन उत्पीड़न की महज 106 शिकायतें पहुंची थी। वहीं वर्ष 2016-17 में आंकड़ा बढ़कर 342 तक पहुंच गया जबकि वर्ष 2017-18 में गत वर्ष के मुकाबले 321 शिकायतें पहुंचीं। इसमें बीते साल के मुकाबले सिर्फ 21 का ही अंतर था। तीन सालों के दौरान गुरुग्राम से यौन उत्पीड़न की कुल 79 शिकायतें आयोग को मिली हैं। महिला आयोग के आंकड़ों पर नजर डालें तो तीन सालों के दौरान घरेलू हिंसा की कुल 461 शिकायतें मिली हंै। मौजूदा वर्ष में घरेलू अत्याचार के मामलों मे कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में महिलाओं ने 258 शिकायतें की थीं। वर्ष 2016-17 में 112 महिलाओं ने घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाई जबकि 2017-18 के दौरान 91 महिलाओं ने शिकायतें भेजीं।

पिछले सप्ताह के दौरान जींद, पानीपत, पंचकूला व फरीदाबाद आदि शहरों में हुई दुष्कर्म की घटनाओं के बावजूद मुख्यमंत्री जहां अपनी पुलिस की पीठ थपथपा रहे हैं वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी करते हुए आक्रामक हो गया है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा हाल ही में हरियाणा के संबंध में जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 के दौरान प्रदेश में सामूहिक दुष्कर्म की 191 घटनाएं हुई हैं। यहां उल्लेखनीय यह है कि राष्टÑीय स्तर पर सामूहिक दुष्कर्म का औसत जहां महज 0.3 प्रतिशत है वहीं हरियाणा में यह औसत 1.5 प्रतिशत है। यह आंकड़ा देश के अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक बताया जा रहा है। पिछले साल हरियाणा में दुष्कर्म के कुल 1189 केस दर्ज किए गए। इनमें से करीब 44 फीसद अथवा करीब 518 घटनाओं में पीड़ितों की उम्र 18 वर्ष से कम रही है।

हरियाणा सरकार द्वारा महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर काबू पाने के लिए भले ही प्रदेश के सभी जिलों में महिला पुलिस थानों की स्थापना की गई है लेकिन धरातल पर आज भी हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। उपरोक्त अवधि के दौरान आरोपियों ने छह वर्ष से कम उम्र की 32 बच्चियों को से बलात्कार किया है। इस अवधि के दौरान 82 ऐसी बच्चियों को बलात्कार अथवा सामूहिक बलात्कार का शिकार बनाया गया है। इस अवधि के दौरान दर्ज हुए कुल मामलों में 549 घटनाएं ऐसी देखने को मिली हैं जिनमें आरोपी पड़ोसी एवं करीबी रिश्तेदार थे।

हरियाणा के हिसार में पिछले माह छह वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कारऔर बलात्कार के बाद हत्या की घटना ने प्रदेश सरकार की चूलें हिलाकर रख दी थी। इस केस में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार करके अपनी जिमेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। अब पिछले तीन दिन के भीतर जींद, पानीपत व पंचकूला के पिंजौर में हुई सामूहिक बलात्कार की घटनाओं में पुलिस कागजी कार्रवाई करने में जुटी है। एनसीआरबी की रिपोर्ट में हरियाणा देश के अन्य राज्यों के मुकाबले महिला उत्पीड़न की घटनाओं में छठे स्थान पर है।

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