हरियाणा में सरकारी धन की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में घोटाले के एक माह बाद अब कोटक महिंद्रा बैंक में पंचकूला नगर निगम के करोड़ों रुपए के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। बैंक कर्मियों की कथित मिलीभगत से नगर निगम पंचकूला के लगभग 150 करोड़ रुपए की राशि की सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में हेर-फेर किया गया है। इस घोटाले के उजागर होने के बाद हरियाणा सरकार ने पूरे मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसडब्ल्यू-एसीबी) को सौंप दी है।
कोटक महिंद्रा बैंक की एक शाखा में पंचकूला नगर निगम की लगभग 150 करोड़ रुपए की सावधि जमा रसीदों (एफडीआर) में कथित अनियमितताओं के संबंध में अज्ञात बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है। नगर निगम ने अपने आधिकारिक रिकॉर्ड और कोटक महिंद्रा बैंक की पंचकूला शाखा की ओर से दर्शाए गए शेष/रिकॉर्ड में करोड़ों रुपए की विसंगति का दावा किया।
पंचकूला नगर निगम के आयुक्त विनय कुमार के अनुसार, लगभग 150 करोड़ रुपए की कुल राशि से संबंधित सावधि जमा रसीदों में अनियमितताएं पाई गईं। कोटक महिंद्रा बैंक के एक प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि नगर निगम की ओर से रखे गए सावधि जमा और संबद्ध बैंक खातों का विस्तृत मिलान किया गया तथा अब तक जांचे गए रिकॉर्ड के आधार पर ‘खातों व लेन-देन को उचित बैंकिंग मानदंडों एवं अनुपालन के अनुसार संभाला गया।’
कार्यालयी अभिलेखों के अनुसार, नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक में 145 करोड़ रुपए की 16 सावधि जमाएं रखी हुई हैं, जिनका परिपक्वता मूल्य 158 करोड़ रुपए बताया गया है। प्राथमिकी में उल्लेख है, ‘अभिलेख पूरी तरह असंगत हैं और बैंक की ओर से वित्तीय अनियमितताओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।’ नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि 13 मार्च तक एक खाते में मात्र 2.17 करोड़ रुपए की शेष राशि दर्शाई गई, जबकि अपेक्षित राशि 50 करोड़ रुपए से अधिक होनी चाहिए थी।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि सावधि जमा रसीदों के परिपक्वता मूल्य और बैंक की ओर से दर्शाई गई वास्तविक शेष राशि में भारी अंतर है। जहां निगम के रिकॉर्ड में दो खाते दर्ज थे, वहीं सत्यापन के दौरान बैंक की ओर से दो अतिरिक्त खाते बताए गए, जो निगम के अभिलेखों में दर्ज नहीं थे। प्राथमिकी में कहा गया है कि बैंक विवरणों में विसंगतियां और इन अघोषित खातों का अस्तित्व वित्तीय अभिलेखों की सत्यता और अखंडता पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
प्राथमिकी के अनुसार, राज्य वित्त विभाग के 18 फरवरी और 17 मार्च के निर्देशों के तहत नगर निगम ने सभी सावधि जमा रसीदों और बैंक खातों का विस्तृत सत्यापन किया। इस दौरान बैंक और निगम के अभिलेखों के बीच महत्वपूर्ण अंतर सामने आया तथा कुछ अतिरिक्त खाते भी प्रकाश में आए, जो आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। नगर निगम ने सभी सावधि जमा रसीदों और बैंक विवरणों के मिलान व सत्यापन के लिए एक समिति गठित की है।
इतने बड़े घोटाले बिना आधिकारिक मिलीभगत के संभव नहीं: हुड्डा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, ‘इतने बड़े घोटाले बिना आधिकारिक मिलीभगत के संभव नहीं हैं, इसलिए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।’ उन्होंने कहा कि 590 करोड़ रुपए के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले के बाद अब पंचकूला नगर निगम में इसी तरह का एक और मामला सामने आया है। उन्होंने इन सभी मामलों में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया।
कानूनी धाराएं:
पंचकूला स्थित एसीबी थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316 (5) (अपराधिक विश्वासघात), 318 (4) (धोखाधड़ी), 336 (3) (जाली दस्तावेज बनाना), 338 (मूल्यवान सुरक्षा, वसीयत आदि की जालसाजी), 340 (जाली और प्रावधान या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2) और 13 (1)(ए)) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
