हरियाणाः जब कानूनों की वापसी के बाद किसानों को आश्वस्त करने के लिए खट्टर को लेना पड़ा कांग्रेसी हुड्डा का सहारा

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि किसानों को चिंता नहीं करनी चाहिए। पीएम ने घोषणा की है कि तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाएगा, तो वास्तव में ऐसा होगा।

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खट्टर को लेना पड़ा हुड्डा का सहारा (फाइल फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल खट्टर और चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं। एक ने दस साल तक हरियाणा पर राज किया तो दूसरे की सत्ता फिलहाल अब है। हुड्डा जाटों के नेता हैं वहीं खट्टर को गैर जाटों का चेहरा माना जाता है। लेकिन दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं। हालांकि बीजेपी की लाचारगी इस बात को लेकर समझी जा सकती है कि कृषि कानूनों की वापसी हुई तो किसानों को मनाने के लिए खट्टर को अपने सबसे बड़े विरोधी हुड्डा के नाम का सहारा लेना पड़ा।

पीएएम मोदी ने जब कृषि कानून को वापस लेने का ऐलान किया तो अब तक तीन कृषि कानूनों के खिलाफ रहने वाले खट्टर भी नरम पड़ गए। हालांकि इस फैसले के लिए भी उन्होंने पीएम मोदी को ही श्रेय दे दिया। खट्टर ने गुरुपर्व के शुभ अवसर पर कृषि कानूनों को निरस्त करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि इन कानूनों को रद्द करने से एक बार फिर प्रधानमंत्री का सर्वोच्च चरित्र पर प्रकाश पड़ा है।

उन्होंने कहा- “मैं सभी से कृषि कानूनों के मुद्दे पर आगे बढ़ने की अपील करता हूं। जहां तक ​​एमएसपी का सवाल है, चूंकि यह किसानों का सुझाव है, पीएम ने घोषणा की है कि इस मामले पर फैसला लेने के लिए किसानों, राज्यों, केंद्र… की एक समिति बनाई जाएगी”।

इसी क्रम में किसानों को आश्वस्त करने के लिए खट्टर ने हुड्डा का भी नाम लिया। खट्टर ने कहा- “किसानों को चिंता नहीं करनी चाहिए… अगर पीएम ने घोषणा की है कि तीन कृषि कानूनों को वापस ले लिया जाएगा, तो वास्तव में ऐसा होगा। यहां तक ​​कि विपक्ष के नेता हुड्डा जी ने भी लोगों से विश्वास रखने को कहा है… भरोसा ना करने जैसी कोई बात नहीं है। अविश्वास है तो दुख की बात है”।

शुक्रवार को अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए खट्टर ने कहा कि जब से केंद्र सरकार किसानों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत लोगों के लाभ के लिए तीन कृषि कानून लाई थी, कुछ किसान संघ दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी ने एक बार फिर व्यापक जनहित को चुनते हुए इन कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा- “हालांकि, इन कानूनों के लागू होने के तुरंत बाद, बड़ी संख्या में किसानों ने इन कानूनों को अपने लिए फायदेमंद माना था और केंद्र सरकार की सराहना भी की थी”।

बता दें कि पिछले लगभग एक साल से किसान इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। इसमें सैकड़ों किसानों की जानें भी जा चुकी हैं। काफी किरकिरी के बाद आखिरकार शुक्रवार को पीएम मोदी ने इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है।

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