सर्वोच्च न्यायालय से इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा के परिवार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने मदद का हाथ बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए 10 लाख रुपए की विशेष वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इस संबंध में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने गुरुवार को हरीश राणा के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सरकार के फैसले की जानकारी दी।

जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बेटे के इलाज में सब कुछ खर्च कर चुके इस परिवार को संबल देना सरकार की प्राथमिकता है। प्रशासन केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कदम उठा रहा है। इसके तहत परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्हें एक स्थायी दुकान आवंटित करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए वे गाजियाबाद विकास प्राधिकरण या नगर निगम की संपत्तियों में से विकल्प चुन सकेंगे।

बता दें कि 32 वर्षीय हरीश राणा करीब 12 साल पहले एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे और तब से वे ‘परसिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट’ में थे। उनकी स्थिति में सुधार न होने पर उनके पिता ने अदालत में याचिका दायर की थी, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने ‘पैसिव यूथेनेशिया’ के तहत जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति दी थी।

डॉक्टरों की टीम ने राणा के आवास का दौरा किया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘इच्छा मृत्यु’ की इजाजत दिए जाने के एक दिन बाद गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में चिकित्सकों की एक टीम ने हरीश राणा (31) के आवास का दौरा किया। वहीं, परिवार ने कहा कि हरीश को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कब स्थानांतरित किया जाए, इस पर निर्णय अभी तक नहीं लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल से ज्यादा समय से कोमा में जीवन-रक्षक प्रणाली (वेंटिलेटर) के सहारे सांस ले रहे हरीश राणा को वेंटिलेटर से हटाकर ‘इच्छा मृत्यु’ की अनुमति दे दी।

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में पहली बार इच्छा मृत्यु (Passive Euthanasia) की मंजूरी दी। अदालत ने लगभग 12 साल से कोमा में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे गाजियाबाद के हरीश राणा मामले में यह फैसला सुनाया है। कोर्ट के फैसले के बाद 32 वर्षीय हरीश के पिता ने कहा कि कोई भी माता-पिता अपने बेटे को ऐसी हालत में नहीं देखना चाहेंगे। पूरी खबर पढ़ें…