उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2027 में हरिद्वार में लगने वाले अर्ध कुंभ मेले को कुंभ मेले की तरह मनाने के लिए धरातल पर जी जान से लगे हुए हैं। परंतु हरिद्वार का मेला अधिष्ठान मुख्यमंत्री के इन सभी प्रयासों पर पलीता लगाने में लगा हुआ हैं। बुधवार को मेला प्रशासन ने केंद्रीय मेला नियंत्रण कक्ष में सभी 13 अखाड़ों की बैठक कुंभ मेले को लेकर आयोजित की परंतु मेला प्रशासन की नाकामी के चलते इस बैठक में 13 में से केवल पांच अखाड़े ही शामिल हो पाए। जबकि अन्य आठ अखाड़े बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे मेला प्रशासन की खासी किरकिरी हुई और यह बैठक बुरी तरह नाकाम रही।
दरअसल कुछ महीने पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अपने व्यक्तिगत प्रयासों से सभी 13 अखाड़े की जो शानदार बैठक आयोजित की थी, उस बैठक को सफल बनाने में हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और तब के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल तथा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के कई अधिकारी व्यक्तिगत रूप से रात दिन लगे हुए थे। यह बैठक हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के प्रयासों के कारण सफल हुई थी और मुख्यमंत्री ने इस बैठक की सफलता पर जिलाधिकारी दीक्षित की पीठ भी थपथपाई थी।
कई अधिकारियों पर एक-दूसरे को नीचा दिखाने का आरोप
परंतु पिछले दिनों हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण और मेला अधिष्ठान में तैनात कई अधिकारियों द्वारा एक दूसरे को नीचा दिखाने की जो घटनाएं घट रही हैं, उसका नतीजा यह हुआ कि बुधवार को कुंभ मेला प्रशासन द्वारा अखाड़ों की आयोजित बैठक नाकाम साबित हुई है। वैसे आज की बैठक आठ अखाड़ों के शामिल न होने के कारण केवल औपचारिक बैठक होकर रह गई और बैठक में मेलाधिकारी सोनिका ने कहा कि बैठक में अखाड़ों एवं साधु-संतों की सम्मति के अनुरूप कुंभ मेला-2027 के दिव्य एवं भव्य आयोजन की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
अखाड़ों की ओर से कहा गया कि अमृत स्रान पर्वों पर परंपरानुसार भव्य पेशवाईयां निकाली जाएंगी। बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हरिद्वार में आगामी वर्ष आयोजित होने वाला कुंभ मेला दिव्य एवं भव्य ढंग से आयोजित करने के लिए सभी अखाड़े प्रतिबद्ध हैं।
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उत्तराखंड के हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेले में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकने की मांग पर सियासी बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि अगर ऐसा करना है तो पहले संविधान बदलना होगा। उन्होंने कहा कि यह देश सभी भारतीयों का है, किसी एक समुदाय की निजी संपत्ति नहीं। संविधान के मुताबिक, देश का कोई भी नागरिक कहीं भी आ-जा सकता है। अगर कोई अपराध करता है तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। इस तरह की बातें समाज में नफरत फैलाती हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
