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जेएनयू में बहस एक ‘पुरानी परंपरा’, राष्ट्रवाद पर सवाल पूछना ‘राष्ट्र विरोधी’ नहीं: हरबंस मुखिया

इतिहासकार हरबंस मुखिया ने कहा कि राष्ट्रवाद अब भी एक बहस की अवधारणा है यहां तक कि दुनिया के विकसित देशों में भी। यह एक सुलझी हुई अवधारणा नहीं है और यह हमारा कर्तव्य है कि इस पर सवाल पूछे।

Author नई दिल्ली | March 7, 2016 12:11 PM
राष्ट्रवाद की क्लास में इतिहासकार रोमिला थापर और हरवंश मुखिया के साथ बातचीत करते जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार। (Photo : Ravi Kanojia)

प्रख्यात इतिहासकार हरबंस मुखिया ने रविवार (6 मार्च) को कहा कि जेएनयू में बहस की एक ‘‘पुरानी परंपरा’’ है। दशकों पहले इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य ऐसे छात्रों को तैयार करना था जो स्थापित सच्चाइयों पर सवाल उठा सकें। मुखिया ने विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘44 साल तक इतिहास पढ़ाने के बाद जब मैं अपने आखिरी व्याख्यान के लिए गया तब मैंने तीन घंटे तैयारी की। जेएनयू छात्रों के बीच इतने सवाल होते हैं कि आप बगैर तैयारी के नहीं जा सकते।’’

उन्होंने रोमिला थापर के साथ ‘इतिहास और राष्ट्रवाद : तब और अब’ पर एक व्याख्यान दिया जो जो जेएनयू में चल रही राष्ट्रवाद शिक्षण श्रृंखला में 14 वां व्याख्यान था। ये कक्षाएं जेएनयू के प्रशासन ब्लॉक में चल रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्रवाद के विचार पर सवाल पूछना आपको राष्ट्र विरोधी नहीं बनाता, देशभक्ति पर किसी का विचार पूछना आपको देशद्रोही नहीं बनाता।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद अब भी एक बहस की अवधारणा है यहां तक कि दुनिया के विकसित देशों में भी। यह एक सुलझी हुई अवधारणा नहीं है और यह हमारा कर्तव्य है कि इस पर सवाल पूछे।

राष्ट्रवाद पर जेएनयू में रोमिला थापर और हरबंस मुखिया की  क्लास

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