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हापुड़ लिंचिंग: पुलिस ने SC को बताया- ‘धार्मिक भावनाओं’ के चलते नहीं मुस्लिम शख्स पर हमला

दरअसल, पुलिस अपने स्टेटस रिपोर्ट के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के उठाए सवाल पर जवाब दे रही थी। आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने उन कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं किया, जिसके जरिए भीड़ के सामूहिक मकसद को साबित किया जा सकता था।

45 साल के कासिम की पश्चिमी यूपी के हापुड़ स्थित पिलखुआ कस्बे में एक गन्ने के खेत में भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी थी।(फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पिछले साल यूपी के हापुड़ में हुई कथित लिंचिंग की वजह ‘धार्मिक भावनाओं पर आधारित’ नहीं हैं। बता दें कि गोरक्षकों के कथित हमले में एक मुस्लिम शख्स की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले के आरोपियों को आपराधिक साजिश के आरोप में क्लीनचिट दे दी है। कोर्ट को दी गई जानकारी में पुलिस का कहना है कि जांच में साजिश की बात सामने नहीं आई है। इस मामले की सुनवाई कर रहे ट्रायल कोर्ट ने कासिम कुरैशी की कथित तौर पर भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने के मामले में मर्डर, मर्डर की कोशिश, दंगे आदि के आरोप तय किए हैं। 45 साल के कासिम की पश्चिमी यूपी के हापुड़ स्थित पिलखुआ कस्बे में एक गन्ने के खेत में भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी थी।

पुलिस ने ‘दोहराया’ कि इस मामले में ”जांच निष्पक्ष ढंग से की गई। इसमें गवाहों के बयान लिए गए और प्रासंगिक तथ्य जुटाए गए। जांच के दौरान इस बात की व्यापक कोशिश की गई कि प्रासंगिक और जरूरी सबूत मसलन- वीडियो सीडी और अपराध में इस्तेमाल डंडे आदि को रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।” दरअसल, पुलिस अपने स्टेटस रिपोर्ट के खिलाफ याचिकाकर्ताओं के उठाए सवाल पर जवाब दे रही थी। आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने उन कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं किया, जिसके जरिए भीड़ के सामूहिक मकसद को साबित किया जा सकता था।

पुलिस ने कहा, ‘आईपीसी के सेक्शन 34, 120बी और 149 सी को चार्जशीट में शामिल न करने का आरोप याचिकाकर्ताओं के पक्षपातपूर्ण सोच का नतीजा है। इस मामले में जानकारी दी जा चुकी है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आईपीसी की प्रासंगिक और सही धाराएं लगाई गई हैं।’

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