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योग सबका है और सब योग के हैं,’ आयु, रंग, जाति, सम्प्रदाय, सरहद के भेद सबसे परे- रांची में बोले पीएम मोदी

मोदी ने कहा, हमारी सरकार ने योग को ड्राइंगरूम से बोर्डरूम तक, शहरों के पार्कों से लेकर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स तक, गली-कूचों से वेलनेस सेंटर तक आज चारों तरफ योग का अनुभव किया जा सकता है।’

रांची | Updated: June 21, 2019 4:25 PM
योग दिवस के दौरान रांची में अपने समर्थकों को अभिवादन करते पीएम मोदी (फोटो- नरेंद्र मोदी ट्विटर)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर यहां अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सद्भाव का संदेश देते हुए कहा कि ‘योग सबका है और सब योग के हैं’, योग आयु, रंग, जाति, सम्प्रदाय, सरहद के भेद सबसे परे है। प्रधानमंत्री ने आज योग दिवस के भव्य आयोजन में यहां कहा, ‘‘बीते पांच वर्षों में योग को हेल्थ और वेलनेस के साथ जोड़कर हमारी सरकार ने इसे प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का मजबूत स्तंभ बनाने का प्रयास किया है। आज हम ये कह सकते हैं कि भारत में योग के प्रति जागरूकता हर कोने तक, हर वर्ग तक पहुँची है।

हमारी सरकार ने योग को ड्राइंगरूम से बोर्डरूम तक, शहरों के पार्कों से लेकर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स तक, गली-कूचों से वेलनेस सेंटर तक आज चारों तरफ योग का अनुभव किया जा सकता है।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग पूरी दुनिया में शांति के लिए, सद्भाव के लिए, उत्तम स्वास्थ्य के लिए और सुखमय जिंदगी के लिए है। उन्होंने कहा कि ‘योग सबका है और सब योग के हैं,’ योग- आयु, रंग, जाति, सम्प्रदाय, मत, पंथ, अमीरी, गरीबी, प्रांत, सरहद के भेद, सीमा के भेद, इन सबसे परे है। मोदी ने देश और दुनिया को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा, ‘‘आज इस प्रभात तारा मैदान से सभी देशवासियों को सुप्रभातम् और आज ये प्रभात तारा मैदान विश्व के नक्शे पर जरूर चमक रहा है। ये गौरव आज झारखंड को मिला है।’’

मोदी ने कहा, ‘‘आज देश और दुनिया के अनेक हिस्सों में लाखों लोग योग दिवस मनाने के लिए अलग-अलग जगह पर जमा हैं, मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूँ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘योग के दुनियाभर में प्रसार में मीडिया के हमारे साथी, सोशल मीडिया से जुड़े लोग जिस तरह की अहम भूमिका निभा रहे हैं, वो भी बहुत महत्वपूर्ण है, मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सिर्फ सुविधाओं से जीवन आसान बनाना काफी नहीं है। दवाईयाँ और सर्जरी का ही समाधान पर्याप्त नहीं है। आज के बदलते हुए समय में इलनेस से बचाव के साथ-साथ वेलनेस पर हमारा अधिक फोकस होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है। यही भावना योग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की भी है।

योग सिर्फ तभी नहीं होता जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर, या दरी पर होते हैं। बल्कि योग अनुशासन है, समर्पण है, और इसका पालन पूरे जीवनभर करना होता है।’’ उन्होंने कहा कि तब मुझे और संतोष मिलता है, जब मैं देखता हूँ कि युवा पीढ़ी हमारी इस पुरातन पद्धति को आधुनिकता के साथ जोड़ रही है, प्रचारित और प्रसारित कर रही है। युवाओं के इनोवेटिव और क्रियेटिव आइडिया से योग पहले से कहीं अधिक लोकप्रिय हो गया है, जीवंत हो गया है। बाद में प्रधानमंत्री ने चालीस हजार से पचास हजार तक की संख्या में एकत्रित आम लोगों के साथ आधे घंटे तक विभिन्न प्रकार के योगासन किये।

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