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मुंबई के युवक के आधार कार्ड को लिंक कर हैकर ने कई को ठगा, ऑनलाइन शापिंग के शिकार घर पहुंचे तो खुला केस

धापड़े ने बताया, " मैंने यूआईडीएआई से संपर्क किया, लेकिन उनके पास किसी के आधार नंबर को बदलने का कोई उपाय नहीं था। उन्होंने कहा कि मुझे अपना एकाउंट डीएक्टिवेट करा लेना चाहिए, लेकिन वह कोई हल नहीं था।"

आधार कार्ड, प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

मुंबई के गिरगांव के 34 वर्षीय कंप्यूटर इंजीनियर अमेया धापड़े के आधार कार्ड को कुछ लोगों ने शापिंग वेबसाइट पर लिंक कर एकाउंट बना लिया और ब्रैंडेड इलेक्ट्रानिक गजेट बेचने के झूठे वादे कर लोगों को ठगना शुरू कर दिया। ठगी के शिकार लोग जब धापड़े के घर अपने पैसे मांगने पहुंचे तब मामला खुला। वह बुरी तरह परेशान हैं। धापड़े ने 2012 में आधार कार्ड बनवाया था। तीन साल बाद पुणे के मांधवा थाने से एक अधिकारी उनके पास आया और कहा कि आप पर एक महिला को फोन पर परेशान करने का आरोप है। धापड़े को अपना बयान दर्ज कराने के लिए पुणे जाना पड़ा। बाद में पता चला कि महिला को परेशान करने वाला कोई और है और उसने अमेया धापड़े के आधार कार्ड का से खुद और दो अन्य लोगों के लिए मोबाइल कनेक्शन लिया है।

बैंक पहुंचा तो मामला खुला : धापड़े ने इस मामले में यह सोचकर शिकायत नहीं दर्ज कराई कि मामला खत्म हो गया है। 2017 में वह अपने पिता के साथ ज्वाइंट एकाउंट खोलवाने बैंक पहुंचा। वहां उसने अपना आधार कार्ड लगाया तो उसे बताया गया कि यह कार्ड स्वीकार नहीं होगा, क्योंकि यह किसी अन्य एकाउंट नंबर से पहले से ही लिंक है। धापड़े ने तुरंत बैंक को ईमेल किया और बताया कि उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया है।

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गूगल से पता चला कि कई जगह हुआ है मिसयूज :उसने गूगल पर अपना नाम डाला तो पता चला कि उसके आधार कार्ड की कापी कई वेबसाइट पर पोस्ट की गई है। इससे वह और चौंका। जल्द ही उसे पता चला कि कोई उसके नाम और आधार कार्ड का दुरुपयोग कर शापिंग वेबसाइट पर एकाउंट बना लिया है और कई लोगों को ब्रैंडेड इलेक्ट्रानिक गजेट बेचने के झूठे वादे कर ठग रहा है। कुछ दिन इसके शिकार लोग उसके घर पहुंच गए और अपने पैसे वापस मांगने लगे।

ठगी के शिकार पैसे मांगने घर पहुंच गए : उनमें से कई लोगों ने हंगामा भी किया और पैसे वापस नहीं करने पर उसको इसके परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी। इससे परेशान धापड़े ने यूआईडीएआई से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई। उसे बताया गया कि उसका नंबर बदल नहीं सकता है, लेकिन यह रद जरूर किया जा सकता है और उसे ऐसा कराना चाहिए। हालांकि धापड़े अपना नंबर रद कराना नहीं चाहता था क्योंकि यह उसके वास्तविक एकाउंट से भी लिंक था और ऐसा कराने से उसकी जिंदगी में कई मुसीबतें आ जाएंगी।

यूआईडीएआई से संपर्क करने पर नहीं मिला उपाय :उसने बताया, “मैंने यूआईडीएआई से संपर्क किया, लेकिन उनके पास किसी के आधार नंबर को बदलने का कोई उपाय नहीं था। उन्होंने कहा कि मुझे अपना एकाउंट डीएक्टिवेट करा लेना चाहिए, लेकिन वह कोई हल नहीं था। वे चाहते थे कि मैं हर ठगी लेनदेन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराऊं। यह एक असंभव कार्य था। उनको कोई बेहतर उपाय बताना चाहिए क्योंकि मैं उस गलती की सजा पा रहा हूं, जो मैंने की ही नहीं है।”

पुलिस कर रही मामले की जांच :धापड़े ने बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स थाने के साइबर सेल में एक शिकायत दर्ज कराई। उसने यह भी निवेदन किया कि वेबसाइट्स से उसके आधार की कापी हटा दी जाए। पुलिस ने उसके निवेदन को संबंद्ध अधिकारी के पास भेज दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई और अंततः केस आगे की जांच के लिए स्थानीय थाने में भेज दी गई। धापड़े ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उसे कोई राहत नहीं मिल रही है क्योंकि ठगी के शिकार लोग लगातार उसके पास आ रहे हैं। अक्टूबर में भिवंडी का एक आदमी उसके घर आया और कहा कि उसने उससे 17 हजार रुपए आईफोन देने के लिए लिया है लेकिन अभी तक कुछ नहीं मिला। उसको पूरी बात बताने पर वह बड़ी मुश्किल से शांत हो सका।

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