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ज्ञानवापी में शिवलिंग का दावा: वीडियोग्राफर गणेश शर्मा का दावा- शिवलिंग पर लगी थी काई, छेड़छाड़ की गई, बच्‍चा भी बता देगा वो फव्वारा नहीं है

वीडियोग्राफर गणेश शर्मा ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मिले शिवलिंग का आकार पर्वताकार है। वीडियोग्राफर ने कहा कि वहां पानी का कोई सोर्स नहीं है।

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ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद विवाद ( फोटो सोर्स: PTI)

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे करने गए वीडियोग्राफर गणेश शर्मा ने शिवलिंग से छेड़छाड़ के आरोप पर कहा कि बच्चा भी बता देगा कि शिवलिंग पर बाद में पत्थर लगा है, वो फव्वारा तो बिल्कुल नहीं है। वीडियोग्राफर ने कहा कि छेड़छाड़ ना होती तो दोनों पत्थर एक जैसे रहते।

वीडियोग्राफर गणेश शर्मा ने हिंदू पक्ष के शिवलिंग से छेड़छाड़ के आरोप पर कहा कि अगर वीडियो को भी ध्यान से देखेंगे तो पता चलेगा कि उसमें फिनिशिंग नहीं है, बस साधारण सा काम किया गया है। उसके ऊपर कुछ चकत्ते बाद में चिपकाए गए हैं। उन्होंने कहा कि उसको देखने से साफ पता चलता है कि दोनों के मटेरियल अलग-अलग हैं और उस चकत्ते को बाद में शिवलिंग पर लगाया गया है। वीडियोग्राफर ने कहा कि उसे अगर 10 साल का बच्चा भी देखेगा तो बता देगा कि वो फव्वारा नहीं है।

सफाई के बाद काला, चमकदार पत्थर: मस्जिद में मिली आकृति की साफ-सफाई के बाद रंग-रूप के बारे में बताते हुए गणेश शर्मा ने कहा कि पहले उस पर काई लगी हुई थी लेकिन साफ-सफाई के बाद वो काला, चमकदार पत्थर निकला और मुझे शिवलिंग जैसा ही लगा। उन्होंने कहा, “मुस्लिम पक्ष के उस आकृति को फव्वारा कहने के दावे में कोई दम नहीं है। उसे किसी भी तर्क की कसौटी पर कसा जा सकता है कि वो फव्वारा नहीं है। ये बात कोई साबित नहीं कर सकता।” वीडियोग्राफर ने कहा कि ऐसे कई शिवलिंग हैं।

वीडियोग्राफर शर्मा ने कहा, “नीचे पत्थर लगा हुआ है और ऊपर का चकत्ता सीमेंट से चिपकाया गया है। दोनों अगर एक साथ बनाए जाते तो एक-जैसे दिखते।” उन्होंने कहा कि मैंने जितना पता किया है उस हिसाब से सीमेंट का आविष्कार 100 साल पहले हुआ है। गणेश शर्मा ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग का पत्थर बिल्कुल वही है जो काशी विश्वनाथ मंदिर के शिवलिंग में लगा हुआ है।

दाल से भी छोटा था छेद: शिवलिंग में किए गए 63 सेंटीमीटर के छेद के दावे पर बात करते हुए वीडियोग्राफर ने कहा, “सिंचाई करने के लिए भी कम से कम एक से डेढ़ सेंटीमीटर का छेद होना चाहिए। ऐसे में फव्वारे के लिए भी कम से कम इतना बड़ा छेद तो होना चाहिए। ऐसे में जब उस आकृति के फव्वारा होने की जांच की गयी तो उसमें झाड़ू की दो सींक बस जा सकी।” उन्होंने कहा कि वो छेद दाल से भी छोटा था। इतने पतले छेद से फव्वारे का पानी नहीं निकल सकता।

30 मई को होगी सुनवाई: ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर गुरुवार (26 मई 2022) दोपहर वाराणसी की जिला अदालत में सुनवाई हुई। सबसे पहले मुस्लिम पक्ष को बहस करने की अनुमति दी गई। हालांकि बहस पूरी नहीं हो सकी और जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने सुनवाई की अगली तारीख 30 मई तय की है। सुनवाई करीब दो घंटे तक ही चल सकी। दोनों पक्षों को न्यायालय द्वारा नियुक्त सर्वेक्षण आयोग की वीडियोग्राफी रिपोर्ट भी दी गई।

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