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ज्ञानवापी मस्जिद केसः बोला RSS- यह ऐतिहासिक तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में रखने का समय

इस बीच, ज्ञानवापी मस्जिद के मामले में सर्वे की पहली रिपोर्ट पूर्व कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा ने कोर्ट को सौंपी है।

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद कॉम्पलेक्स का पास की से लिया गया फोटो। (फोटोः पीटीआई)

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे पर जारी विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि तथ्यों को सामने आने देना चाहिए। सच को अधिक समय तक छिपाया नहीं जा सकता। बुधवार (19 मई, 2022) को आरएसएस के संवाद प्रकोष्ठ इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के पत्रकार सम्मान समारोह में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इस विषय पर विचार जाहिए किए।

उन्होंने कहा, ‘‘कुछ तथ्य हैं जो सामने आ रहे हैं। मेरा मानना है कि तथ्य को सामने आने देना चाहिए। किसी भी स्थिति में सच्चाई सामने आएगी ही।’’ आंबेकर ने कहा, ‘‘आप कितने समय तक सच को छिपाएंगे? मेरा मानना है कि ऐतिहासिक तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में समाज के सामने आना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि वह समझते हैं कि ज्ञानवापी मुद्दे का तथ्य सामने आने दिया जाना चाहिए और सच्चाई को अपना रास्ता तलाशने देना चाहिए।

समारोह में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि जब उन्हें मस्जिद में शिवलिंग पाए जाने की जानकारी मिली तब वह भावुक हो गए। वह वाराणसी में ही थे, जब यह घटनाक्रम चल रहा था। बालियान के मुताबिक, जब किसी पत्रकार ने उन्हें बताया कि कई सदी से नंदी शिवजी का इंतजार कर रहे थे, तब उनकी आंखें भर आईं।

आरएसएस के प्रचार प्रमुख आंबेकर की यह टिप्पणी अहम मानी जा रही है, क्योंकि नौ नवंबर 2019 को जब उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम मंदिर मामले में फैसला दिया था, तब ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा स्थित शाही ईदगाह मामले में एक सवाल के जवाब में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि संघ ऐतिहासिक कारणों से रामजन्मभूमि आंदोलन से एक संगठन के तौर पर जुड़ा था, यह अपवाद था। उन्होंने कहा था कि अब हम मानव विकास के साथ जुड़ेंगे।

दरअसल ज्ञानवापी मस्जिद, प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर के करीब ही है। इसकी दीवार से लगी प्रतिमाओं के सामने दैनिक पूजा अर्चना करने से जुड़ी हिंदू महिलाओं के एक समूह की याचिका पर एक स्थानीय अदालत सुनवाई कर रही है।

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