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ज्ञानवापी: बीच डिबेट में लड़की बोली- औरंगजेब ने नालंदा को जलाकर राख कर दिया तो भड़क गए रहमान मुजीब

इस्लामिक स्कॉलर मौलाना नदीमुद्दीन ने कहा, ‘भारत का इतिहास मुग़लों से शुरू नहीं होता है, देश के मुसलमानों को औरंगज़ेब और बाबर से जोड़ने की ज़रुरत नहीं है’।

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ज्ञानवापी मंदिर-मस्जिद केस ( फोटो सोर्स: PTI)

ज्ञानवापी और मथुरा का मुद्दा जैसे-जैसे विवादों में सुर्खियों बटोर रहा है। वैसे- वैसे मुगल काल के आक्रांताओं को लेकर वहस होने लगी है। मुगल शासक औरंगजेब ने अपने शासन काल में तालिबानी फरमान से हिंदू आस्था से जुड़े स्मारकों को क्षति पहुंचाई।

एक निजी टीवी चैनल पर डिबेट के बीच लड़की ने औरंगजेब को लेकर जो कुछ कहा, उससे रहमान मुजीब भड़क गए। लड़की ने कहा, ‘शायद आप भूल रहे हैं कि जिस औरंगजेब का जिक्र आज हो रहा है, उसी औरंगजेब ने नालंदा विश्विद्यालय को जलाकर राख दिया। वो खंडहर आज भी इस बात की गवाही है कि हमारी सभ्यता और संस्कृति को किस तरह से नुकसान पहुंचाया गया। मुगलों ने हमारी सभ्यता और संस्कृति को नष्ट करने की कोशिश की है।

लड़की ने कहा कि यहां ज्ञानवापी मंदिर में शिवलिंग को रखा गया। ताकि मुस्लिम समुदाय वहां पर वजू कर सकें। जिससे हमारे आराध्य, हमारा धर्म और हमारी संस्कृति का अपमान हो। इसके जवाब में रहमान मुजीब ने लड़की से पूछा- ये आपको ज्ञान कहां से मिला ?

इसी के जवाब में कथावाचक देवकीनंद ठाकुर ने कहा कि इनसे पूछो कि औरंगजेब और बाबर ने हिंदुस्तान में आकर मंदिर तोड़े की नहीं तो कहते हैं तोड़े। जब इनसे कहो कि वो हमें दे दो तो कहते हैं कि देंगे नहीं। उन्होंने कहा कि एक हैदराबाद से कहते हैं कि कयामत तक वो मस्जिद रहेगी। उन्होंने कहा कि हमें शिव जी मंदिर और मथुरा मंदिर हर हाल में लेना है। हमें कोर्ट के माध्यम से लेना है। कोर्ट के माध्यम से संविधान हमें अधिकार देता है।

वहीं इस्लामिक स्कॉलर मौलाना नदीमुद्दीन ने कहा, ‘भारत का इतिहास मुग़लों से शुरू नहीं होता है, देश के मुसलमानों को औरंगज़ेब और बाबर से जोड़ने की ज़रुरत नहीं है’।

ज्ञानवापी केस क्या है?
दरअसल, 1991 में याचिकाकर्ता स्थानीय पुजारियों ने वाराणसी कोर्ट में एक याचिका दायर की। इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा करने की इजाजत मांगी थी। इस याचिका में कहा गया कि 16वीं सदी में औरंगजेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनवाई गई थी।

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि औरंगजेब के आदेश पर मंदिर के एक हिस्से को तोड़कर वहां मस्जिद बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद परिसर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं और उन्हें ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में पूजा की इजाजत दी जाए। हालांकि, 1991 के बाद से यह मुद्दा समय-समय पर उठता रहा, लेकिन कभी भी इसने इतना बड़ा रूप नहीं लिया, जितना इस समय है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी थी।

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