Gurugram police arrested three accused for assaulting, abusing and chopping off Muslim youth beard - मुस्‍ल‍िम युवक को बांध कर कटवा दी दाढ़ी, नाई को भी पीटा, तीन ग‍िरफ्तार - Jansatta
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मुस्‍ल‍िम युवक को बांध कर काट दी दाढ़ी, नाई को भी पीटा, तीन ग‍िरफ्तार

हरियाणा के गुरुग्राम में पुलिस ने एक मुस्लिम युवक की जबरन दाढ़ी काटने के आरोप में तीन लोगों को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपियों को कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक पर हमला करने, गालियां देने और सेक्टर 37 स्थित एक सैलून पर उसकी जबरन दाढ़ी काटने के आरोप में गुरुवार (2 अगस्त) को गिरफ्तार किया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

हरियाणा के गुरुग्राम में पुलिस ने एक मुस्लिम युवक की जबरन दाढ़ी काटने के आरोप में तीन लोगों को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपियों को कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक पर हमला करने, गालियां देने और सेक्टर 37 स्थित एक सैलून पर उसकी जबरन दाढ़ी काटने के आरोप में गुरुवार (2 अगस्त) को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों पर सैलून के नाई को भी पीटने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के गौरव, इकलाश और हरियाणा के नितिन के तौर पर हुई है। घटना बीती 31 जुलाई की है जब आरोपियों ने कथित तौर पर खांडसा मंडी इलाके में पीड़ित का अपमान करना शुरू कर दिया था। गुरुग्राम पुलिस के पीआरओ सुभाष बोकन ने पीटीआई को बताया, ”जफरुद्दीन ने शुरू में धार्मिक अपमान को नजरअंदाज किया लेकिन आखिर में उसने जवाब दिया। यह देखते हुए आरोपियों मे जफरुद्दीन पर हमला कर दिया। फिर वे उसे सैलून ले गए और उसकी दाढ़ी काट दी।”

पुलिस अधिकारी ने बताया कि सैलून से लौटने से पहले आरोपियों ने पीड़ित को धमकी दी कि अगर पुलिस को खबर की तो भयानक अंजाम भुगतना होगा। अगले दिन जफरुद्दीन ने सेक्टर 37 के पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। हरियाणा के मेवात के रहने वाले जफरुद्दीन गुरुग्राम में अपने दोस्त इब्राहिम से मिलने के आए थे। बता दें कि देश में भीड़ के द्वारा की जाने वाली हिंसा की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं।

पिछली ऐसी घटनाओं में गाय का मुद्दा बड़ा कारण रहा लेकिन इस बार अंतर यह है कि मुस्लिम युवक की दाढ़ी को विवाद का केंद्र बनाया गया। विपक्षी पार्टियां देश में अल्पसंख्यकों के प्रति नरम रुख रखते हुए भीड़ के द्वारा की जाने वाली हिंसा के लिए केंद्र की भाजपा नीत मोदी सरकार को लगातार घेर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले 4 वर्षों में भीड़ के द्वारा अंजाम दी गई हिंसा के 134 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें अब तक 68 लोगों की जानें जा चुकी हैं। मरने वालों में दलित भी शामिल हैं। शिकार बनाए गए लोगों में 50 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय के बताए जाते हैं।

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