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गुलबर्ग सोसायटी मामला: नंबर एक दोषी ने एसआईटी अदालत में किया आत्मसमर्पण, जमानत के बाद था फरार

कैलाश धोबी गुलबर्ग सोसायटी मामले में हत्या और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 11 लोगों में से एक है।
Author अहमदाबाद | June 13, 2016 17:27 pm
साल 2002 में हुए गुलबर्ग सोसायटी कांड में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोग मारे गए थे। (पीटीआई फोटो)

वर्ष 2002 के गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले के एक दोषी ने सोमवार (13 जून) को विशेष एसआईटी अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पिछले वर्ष दिसंबर में उसे अस्थायी जमानत दी गयी थी जिसकी मियाद खत्म हो गई थी। कैलाश धोबी गुलबर्ग सोसायटी मामले में हत्या और अन्य अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 11 लोगों में से एक है। इस मामले में एसआईटी ने उसे आरोपी नंबर एक बनाया है। वर्ष 2002 के इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी समेत 69 लोगों की मौत हो गई थी।

विशेष लोक अभियोजक आर सी कोडेकर ने कहा, ‘जमानत अवधि समाप्त होने के बाद से कैलाश धोबी गिरफ्तारी से बच रहा था। आरोपी नंबर एक के रूप में उसका नाम दर्ज है और उसे हत्या और आन्य आरोपों में दोषी ठहराया गया है। सोमवार (13 जून) को उसने विशेष एसआईटी जज पी बी देसाई के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने दोषी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। विशेष एसआईटी अदालत ने सोमवार (13 जून) को कहा कि वह गुलबर्ग सोसायटी मामले में दोषी ठहराये गये 24 लोगों को शुक्रवार को सजा सुनायेगा।

धोबी को वर्ष 2002 में गिरफ्तार किया गया था और वह लगभग 14 वर्षों तक जेल में बंद था। उसे पिछले वर्ष दिसंबर में उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य के आधार पर अस्थायी जमानत दी थी और उसके बाद दो बार जमानत अवधि बढ़ायी भी गयी। इसके बाद जमानत शर्तों के अनुसार उसे इस वर्ष 29 जनवरी को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करना था क्योंकि 25 जनवरी को तीसरी बार जमानत अवधि बढ़ाने के लिए दायर की गयी उसकी याचिका उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी।

वर्ष 2002 के गुलबर्ग सोसायटी मामले में दोषी ठहराया गया धोबी गुजरात उच्च न्यायालय को एक पत्र लिखने के बाद नाटकीय रूप से फरार हो गया। अपने पत्र में उसने वादा किया था कि जिस दिन विशेष अदालत अपना फैसला सुनायेगी, उस दिन वह लौट आयेगा। हालांकि दो जून को जब अदालत ने इस मामले में 24 लोगों को दोषी ठहराया तो उस दिन उसने आत्मसमर्पण नहीं किया।

सजा पर फैसले को लेकर कोडेकर ने अदालत से कहा कि चूंकि धोबी मौजूद नहीं है इसलिए उसे सीआरपीसी की धारा 426 के तहत सजा नहीं सुनायी जा सकता क्योंकि इस प्रावधान के तहत सजा सुनाये जाने के समय दोषी का अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य हो जाता है। गुलबर्ग सोसायटी मामला वर्ष 2002 के गोधरा दंगों से जुड़े उन नौ मामलों में से एक है जिसकी जांच का जिम्मा उच्चतम न्यायालय ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपा था। इस मामले में 66 लोगों को आरोपी बनाया गया था जिसमें से 24 को दोषी ठहराया गया और 36 लोगों को बरी कर दिया गया।

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