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छोटे बच्चों को ‘बाल डॉक्टर’ बनाएगी गुजरात सरकार, टॉर्च-एप्रन-दवाओं से करेगी लैस, IMA ने खारिज किया आइडिया

ये बाल डॉक्टर्स छोटी बीमारियों में आयुर्वेदिक पद्धति के जरिए इलाज करेंगे। वे मिड डे मील से पहले बाकी बच्चों को हाथ धोने के लिए प्रेरित करेंगे।

Author अहमदाबाद | January 2, 2018 09:03 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल )

ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी से जूझ रही गुजरात सरकार एक नया आइडिया लेकर आई है। यहां ‘बाल डॉक्टर्स’ राज्य स्कूल स्वास्थ्य प्रोग्राम के तहत बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगे। टीओआई ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हवाले से कहा कि अलवली जिले के नवग्राम गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले छठी क्लास के काजल भूपतभाई नाम के ‘बाल डॉक्टर’ को प्राइमरी स्कूल के पायलट प्रोजेक्ट के लिए नामांकित किया गया है। ‘बाल डॉक्टर्स’ स्टैथोस्कोप और आयुर्वेदिक दवाइयों से लैस होंगे। ये दवाइयां उनके सहपाठियों के लिए दी जाएंगी। अधिकारियों ने कहा कि उन्हें आयुर्वेदिक दवाइयों की एक खेप दी जाएगी, ताकि वे किसी भी स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे से निपट सकें। हर प्राइमरी स्कूल में एक बाल डॉक्टर नियुक्त किया जाएगा, जिसके लिए राज्य का शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से काम करेगा।

क्या करेंगे बाल डॉक्टर्स: ये बाल डॉक्टर्स छोटी बीमारियों में आयुर्वेदिक पद्धति के जरिए इलाज करेंगे। वे मिड डे मील से पहले बाकी बच्चों को हाथ धोने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके अलावा हर हफ्ते के बुधवार को होने वाले आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (WIFS) प्रोग्राम (राष्ट्रीय हेल्थ मिशन) को भी मॉनिटर करेंगे। अॉर्डर के मुताबिक, वे अपने सहपाठियों को लत मुक्त बनाने और मौसम संबंधित बीमारियों के बारे में जानकारी देंगे।  एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि हर बाल डॉक्टर को एक अप्रन और बैच दिया जाएगा, ताकि वह डॉक्टर की तरह दिखे। इसके अलावा उन्हें टॉर्च, आयुर्वेदिक दवाइयों की किट, बुकलेट और स्वास्थ्य संबंधी पोस्टर्स भी दिए जाएंगे। राज्य की हेल्थ कमिश्नर डॉ.जयंती रवि ने टीओआई से कहा कि छात्रों को पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग द्वारा एक नोडल टीचर नियुक्त किया जाएगा, जो उनकी गतिविधियों पर नजर रखेगा। उन्होंने कहा कि हम हर स्कूल में इस अवधारणा को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि गुजरात के इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) को यह आइडिया पसंद नहीं आया। राज्य के आईएमए ब्रांच के अध्यक्ष डॉ.योगेंद्र मोदी ने कहा कि मुझे इस पहल के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन एेसा नहीं होना चाहिए। हम सिर्फ एलोपैथिक दवाइयों में भरोसा करते हैं और सिर्फ उसी को डॉक्टर माना जा सकता है, जिसने एमबीबीएस किया हो।

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