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वकील को फंसाने के लिए संजीव भट्ट ने पुलिसवाले से खरीदवाई अफीम, चार्जशीट में गंभीर आरोप

ड्रग्स रखने के इस फर्जी मामले में राजपुरोहित को फंसाने के आरोप में बीते पांच सिंतबर को भट्ट गिरफ्तार किए गए थे।

Author November 21, 2018 1:52 PM
संजीव भट्ट। (फोटोः FB)

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी संजीव भट्ट ने साल 1996 में एक वकील को ड्रग्स के मामले में फंसाने के लिए पुलिस वाले से अफीम खरीदवाई थी। बाद में उन्होंने उसे वकील के होटल के कमरे में रखवाया था। यह काम करने के लिए भट्ट ने कॉन्सटेबल मालाभाई राबड़ी को 20 हजार रुपए दिए थे। ये बातें इस मामले की जांच कर रही क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) क्राइम की 550 पेज वाली चार्जशीट में सामने आई हैं। भट्ट, तब बनासकांठा जिले के एसपी थे।

चार्जशीट के मुताबिक, भट्ट के कहने पर राबड़ी एक किलो अफीम लाया था। इसी तरह राजस्थान के पालनपुर के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को भी फंसाने के लिए अफीम प्रयोग की गई थी। बता दें कि ड्रग्स रखने के इस फर्जी मामले में राजपुरोहित को फंसाने के आरोप में बीते पांच सिंतबर को भट्ट गिरफ्तार किए गए थे। मामले में तत्कालीन बनासकांठा क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर इंद्रवदन व्यास को भी अरेस्ट किया गया।

हाईकोर्ट ने 22 साल पुराने मामले की जांच सीआईडी से करने को कहा, जिसके बाद उसने पिछले महीने पालनपुर कोर्ट में चार्जशीट जमा की। उसके मुताबिक, भट्ट ने राबड़ी से बनासकांठा जिला स्थित दीसा तहसील के शेरपुरा इलाके से अफीम खरीदवाई थी। 29 अप्रैल, 1996 को राबड़ी के पास वह अफीम बैगनी रंग के बैग में आई थी, जिसे उसने लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) पुलिस इंस्पेक्टर व्यास के कपबोर्ड में रखा था।

चार्जशीट में आरोप है कि ठीक इसी तरह का बैग पालनपुर स्थित लाजवंती होटल के कमरा नंबर 305 में भी पाया गया था, जहां पर फर्जी छापेमारी कराई गई थी। एलसीबी दस्ते ने शेरपुरा में छापेमारी के साथ नारकोटिक्स एक्ट के तहत चार मामले दर्ज किए थे। मौके से उसे 35.620 ग्राम अफीम मिला था। चार्जशीट में दावा किया गया कि अफीम लाजवंती होटल में रखवाया गया था और छापेमारी में वैसा ही अफीम बरामद किया गया था।

यही नहीं, चार्जशीट में यह भी बताया गया कि भट्ट ने पालनपुर सिटी इंस्पेक्टर गोहिल व सब इंस्पेक्टर पार्थीभाई चौधरी को राजपुरोहित को फर्जी नारकोटिक्स के मामले में फंसाने के लिए कहा था। पर उन दोनों ने वैसा करने से मना कर दिया था। सीआईडी की चार्जशीट के मुताबिक 30 गवाहों ने भट्ट, व्यास और मालाभाई के खिलाफ गवाही दी, जिनमें पुलिस वाले तक शामिल हैं।

गौरतलब है कि भट्ट सुर्खियों में सबसे पहले तब आए, जब उन्होंने 2002 के गुजरात दंगों में तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के कथित संलिप्तता का आरोप लगाया था। दंगों में लगभग एक हजार लोग मारे गए थे। हालांकि, 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने मोदी को दंगों के मामले में क्लीन चिट दी। वहीं, 2011 में भट्ट को ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में बर्खास्त किया गया था।

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