गुजरात: बकरीद पर जानवरों को कुर्बानी से बचाने के लिए बाजार के सभी बकरी-भेड़ खरीदने की तैयारी!

गुजरात में एक एनिमल राइट एक्टिविस्ट समूह ने बकरीद के मौके पर जानवरों को कुर्बानी से बचाने के लिए भेड़ और बकरियों को खरीदने का फैसला किया है। इससे पहले सर्वधर्म जीवदया समिति मध्य पूर्व के देशों में बकरियों और भेड़ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का अभियान चला चुकी है।

Author वडोदरा | Updated: June 3, 2019 7:58 AM
bakrid, gujarat news, vadodara, animal right activist, goats and sheeps, animal marked, Sarvadharm Jeevdaya Samiti, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiग्रुप सूरत के पशु मंडी से अब तक करीब 100 भेड़ और बकरी खरीद चुका है। (एक्सप्रेस फोटोः भूपेंद्र राणा)

गुजरात में बकरीद के मौके पर जानवरों को कुर्बानी से बचाने के लिए एक एनिमल राइट एक्टिविस्ट समूह ने एक अनोखा तरीका निकाला है। समूह ने पशु बाजार से भेड़ और बकरियों को खरीदने का फैसला किया है। समूह की तरफ से सूरत की पशु मंडी से अब तक करीब 100 भेड़ और बकरियों को खरीदा जा चुका है।

सर्वधर्म जीवदया समिति नाम के समूह ने इससे पहले मध्य पूर्व के देशों में बकरियों और भेड़ के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का अभियान चला चुकी है। शहर में इन जानवरों की देखभाल करने वाली पशु गृह के संचालक समिति श्री वडोदरा पंजरापोल के सचिव राजीव शाह का कहना है, ‘हम न तो किसी धर्म के खिलाफ है और ना ही यह अभियान किसी धर्म के खिलाफ है।

हम जानवरों के अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि लोग स्वेच्छा से इस काम में शामिल हों। हम पशु प्रेमी है और इन मूक जीवों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार से आहत हैं।’ अखिल भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य शाह के अनुसार समूह की योजना अन्य मंडियों से भी इसी तरह से जानवरों को खरीदने की है।

मुस्लिम समुदाय के नेताओं का कहना है कि पशु अधिकार कार्यकर्ता बकरीद के विरोध के प्रति हमेशा से मुखर रहे हैं। भेड़ और बकरियों को खरीदने का यह कदम राज्य के कुछ हिस्सों में जानवरों की उपलब्धता को प्रभावित करेगा। मुस्लिम सोशल एक्टिविस्ट जुबेर गोपलानी ने कहा, ‘पहले भी इस तरह की घटनाओं को देखते हुए और बकरीद पर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए समुदाय के नेता और यहा तक की दारूल उलूम ने भी पिछले साल एक सर्कुलर जारी कर समुदाय के सदस्यों को कुर्बानी के वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से बचने को कहा था।’

उन्होंने कहा कि कुर्बानी की परंपरा पहले से ही चलती आ रही है और यह एक अत्यंत निजी मसला है और इसका विरोध करते समय यह जरूरी है कि इससे किसी अन्य समुदाय की भावनाएं आहत ना हों। इस बीच स्थानीय पशु पालकों का कहना है कि मुस्लिम पशुओं को स्थानीय पशुपालकों से खरीदते हैं ना कि मंडियों से।

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