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अनशन पर प्रवीण तोगड़िया, नरेंद्र मोदी पर निशाना- चाय की ठेली या पकौड़े तलने के लिए कड़ाही तो नहीं मांगी थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए तोगड़िया ने कहा, "पचास सालों तक हिन्दुओं के कल्याण के लिए अपना जीवन न्योछावर करने के बाद मुझे वीएचपी से निकाल फेंका गया, जबकि मैंने न तो कोई पद मांगा था।
Author April 17, 2018 18:58 pm
वीएचपी के गुजरात चीफ कौशिक मेहता और महासचिव रणछोड़ भारवाड भी तोगड़िया के साथ अनशन पर बैठे हैं।

विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) से इस्तीफा देने वाले प्रवीण तोगड़िया ने आज (17 अप्रैल) से अहमदाबाद में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। उनके साथ मंच पर सैकड़ों साधू-संत भी बैठे हैं। इनलोगों की मांग है कि अयोध्या में जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण कराया जाय और देश में कॉमन सिविल कोड लागू किया जाय। इसके अलावा तोगड़िया ने हिन्दुओं, किसानों, युवाओं, महिलाओं और मजदूरों के लिए भी लड़ाई लड़ने की बात कही है। बता दें कि तीन दिन पहले विहिप में हुए चुनाव में तोगड़िया गुट के राघव रेड्डी की हार हुई थी और उनकी जगह रिटायर्ड जस्टिस वी सदाशिव कोकजे वीएचपी के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। अध्यक्ष चुने जाने के तुरंत बाद कोकजे ने तोगड़िया को कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटा दिया था। इसके बाद तोगड़िया ने वीएचपी से इस्तीफा दे दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए तोगड़िया ने कहा, “पचास सालों तक हिन्दुओं के कल्याण के लिए अपना जीवन न्योछावर करने के बाद मुझे वीएचपी से निकाल फेंका गया, जबकि मैंने न तो कोई पद मांगा था और न ही प्रधानमंत्री का पद मांगा था। चाय का ठेला या पकौड़ा तलने की कड़ाही भी तो नहीं मांगी थी। हमने तो सिर्फ राम मंदिर मांगा। इसी मुद्दे के बल पर वो प्रधानमंत्री बने।” वीएचपी के गुजरात चीफ कौशिक मेहता और महासचिव रणछोड़ भारवाड भी तोगड़िया के साथ अनशन पर बैठे हैं।

62 साल के तोगड़िया पीएम मोदी और संघ के साथ लंबे समय तक काम कर चुके हैं। उन्होंने अपनी आक्रामक शैली में करीब दर्जनभर पुलिसकर्मियों और 200 लोगों की मौजूदगी में पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “नरेंद्रभाई से मेरी कोई निजी लड़ाई नहीं है। उनसे मेरा मतभेद सिर्फ राम मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बनाने और उस मुद्दे पर चुप्पी साधे रहने पर है। अगर मैं पद की लालसा रखता और उनसे मतभेद होता तो मैं साल 2001 में ही गुजरात का मुख्यमंत्री बन सकता था और मोदी जी यहां सीएम नहीं बन पाते।”

उन्होंने कहा, “नरेंद्रभाई कहते हैं कि सरकार कोर्ट के आदेश का पालन करेगी। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या 1982 से पहले कोई अदालती आदेश था, जब राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ था। क्या उन्हें याद है कि आडवाणी जी ने सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी? 1992 में भी कोर्ट कहां गया था जब मस्जिद ढहाए गए थे?” तोगड़िया ने राष्ट्रव्यापी गोकशी पर प्रतिबंध लगाने और कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की भी मांग की है।

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