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सोहराबुद्दीन मामला: सस्‍पेंडेड आईपीएस ने अगस्‍त में मांगी थी वीआरएस, नहीं मिलने पर केंद्र के खिलाफ ट्रिब्‍यूनल में डाली थी अर्जी

रजनीश ने बताया कि उन्होंने कई बार वीआरएस के लिए कहा लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली और ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पुलिस अधिकारी इसी तरीके से सेवानिवृत्त हुए लेकिन उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया।

रजनीश ने बताया कि उन्होंने कई बार वीआरएस के लिए कहा लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली और ऐसे कई उदाहरण हैं।

वॉलेंटरी रिटायरमेंट के लिए आवेदन करने वाले 1992 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी रजनीश राय को केंद्र सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। 2005 के सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की जांच करने वाले राय ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस साल अगस्त में वीआरएस के लिए आवेदन किया था। उनके वीआरएस अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने के लिए हाल ही में अहमदाबाद में केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (सीएटी) का दरवाजा खटखटाया था। राय ने कहा कि रिटायरमेंटे के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। रजनीश राय को निलंबित करने का ऑर्डर 18 दिसंबर को जारी किया गया था। ऑर्डर में कहा गया था कि राय को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाता है। 2007 में राय गुजरात CID (क्राइम) में डीआईजी के पद पर थे। उन्होंने सोहराबुद्दीन केस में आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा, राजकुमार पांड्या और दिनेश एमएन को गिरफ्तार किया था। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से वह केंद्रीय नियुक्ति पर थे।

निलंबन आदेश में कहा गया, ’30 नवंबर को आंध्रप्रदेश के चित्तूर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काउंटर इनसर्जेंसी ऐंड ऐंटी टेररिज्म (सीआईएटी) स्कूल में महानिरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं अनधिकृत तरीके से सौंपने पर रजनीश राय के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।’ इसमें यह भी कहा गया है कि निलंबन के दौरान रजनीश का हेडक्वॉर्टर भी आंध्र प्रदेश का चित्तूर ही होगा और बिना इजाजत के इसे छोड़ नहीं सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक वह गांधीनगर में अपने निवास पर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वीआरएस के माध्यम से रिटायर होने के लिए कोई अनुमति नहीं चाहिए और ऐसे कई उदाहरण थे जहां पुलिस अधिकारी इसी तरह से रिटायर हुए थे लेकिन उन्हें निलंबित नहीं किया गया था।

रजनीश ने बताया कि उन्होंने कई बार वीआरएस के लिए कहा लेकिन उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली और ऐसे कई उदाहरण हैं जहां पुलिस अधिकारी इसी तरीके से सेवानिवृत्त हुए लेकिन उन्हें सस्पेंड नहीं किया गया। उन्होंने कहा, ‘रिटायरमेंट के लिए किसी तरह की अनुमति की जरूरत नहीं है और एक बार जब मैं रिटायर हो गया तो सस्पेंड कैसे हो सकता हूं? ऐसे कई अधिकारी जिन्होंने ऐसी परिस्थितियों में रिटायरमेंट लिया लेकिन उन्हें निलंबित नहीं किया गया। उनसे पूछिए कि राणा (आईएएस जेएस राणा) और तमिलनाडु के शेट्टी (आईएएस केवीआर शेट्टी) को निलंबित क्यों नहीं किया गया।’

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