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गुजरात यूनिवर्सिटी: नॉनवेज खाने वाले विदेशी छात्रों को जबरन मुस्लिम बहुल इलाके में किया शिफ्ट, पुलिस-मीडिया में जाने को लेकर वॉर्निंग

300 विदेशी छात्रों में से 35 अफगानिस्तान से हैं। सितंबर में इन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ अहमदाबाद के मुस्लिम बहुल लाल दरवाजा इलाके में शिफ्ट कर दिया गया था। यह जगह कैंपस से 10 किमी दूर है। ऐसा करने की वजह इन छात्रों की 'खाने-पीने की आदत और संस्कृति' बताई गई थी।

Author February 14, 2019 1:32 PM
कैंपस के हॉस्टल रूम का एक कमरा। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

गुजरात यूनिवर्सिटी के स्टडी अब्रॉड प्रोग्राम (SAP) के करीब 300 विदेशी छात्रों को एक हलफनामे पर साइन करने के लिए कहा गया है। इस हलफनामे में लिखा है कि वे यूनिवर्सिटी अधिकारियों की इजाजत के बिना मीडिया या पुलिस से संपर्क नहीं करेंगे। पुलिस या मीडिया से संपर्क न करने का यह निर्देश ऐसे वक्त में आया है, जब इससे पहले दक्षिण एशियाई देशों के बहुत सारे छात्रों ने ‘गंदी जगहों पर ठहराए जाने’ की शिकायत की थी। ऐसे छात्रों को यह भी चेतावनी दी गई थी कि गुजरात यूनिवर्सिटी के अफसरों की इजाजत के बिना पुलिस या मीडिया में जाना कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन माना जाएगा और इसकी वजह से यूनिवर्सिटी या कॉलेज से निष्कासन और देश से डिपोर्ट करने की कार्रवाई हो सकती है।

बता दें कि इन 300 विदेशी छात्रों में से 35 अफगानिस्तान से हैं। सितंबर में इन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ अहमदाबाद के मुस्लिम बहुल लाल दरवाजा इलाके में शिफ्ट कर दिया गया था। यह जगह कैंपस से 10 किमी दूर है। ऐसा करने की वजह इन छात्रों की ‘खाने-पीने की आदत और संस्कृति’ बताई गई थी। सैप कॉर्डिनेटर नीरज गुप्ता ने द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया, ‘(अफगान) छात्र अधिकतर लाल दरवाजा इलाके में रह रहे हैं। दरअसल, वे सभी मुसलमान हैं। ऐसे में उनके खाने-पीने की आदतों, समुदाय और संस्कृति के मद्देनजर उन्हें वहां रखा गया है। उन्हें शहर के पश्चिमी इलाके में हॉस्टल देने की कोशिश की गई, लेकिन छात्रों और पड़ोसियों से उनके नॉनवेज खाने की आदत को लेकर शिकायतें मिलीं। वहीं, इन छात्रों ने यह शिकायत की कि उन्हें आसानी से नॉनवेज खाना नहीं मिलता। इसलिए हॉस्टल की सुविधा बंद कर दी गई।’

गुप्ता खानपुर स्थित भारतीय विद्या भवन पीजी कॉलेज ऑफ आर्ट्स ऐंड कॉमर्स के प्रिंसिपल भी हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी छात्रों को निर्देश दिया जाना जरूरी था। हलफनामा साइन करवाने की बात कबूलते हुए उन्होंने कहा, ‘ऐसा करने की वजह थी। कुछ वक्त पहले लड़कों के हॉस्टल के हालात को लेकर एक चैनल में झूठी रिपोर्ट आई। छात्र ऐसी चीजों के परिणाम के बारे में नहीं समझते। इससे देश की छवि ही खराब होती है।’

हालांकि, लाल दरवाजा इलाके मे रहने वाले एक अफगान छात्र का कहना है कि सभी अफगान बाशिंदे नॉनवेज खाना नहीं खाते। अगर उसे कॉलेज के नजदीक हॉस्टल दिया जाएगा तो वह नॉनवेज खाना नहीं खाएगा। बता दें कि ये विदेशी छात्र मूलरूप से सार्क और अफ्रीकी देशों से ताल्लुक रखते हैं। वे इंडियन काउंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशंस और एजुकेशनल कंसलटेंट्स इंडिया लिमिटेड के तहत स्टडी अब्रॉड प्रोग्राम के हिस्सा हैं। ये 300 छात्र गुजरात यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों और अहमदाबाद और आसपास स्थित 9 संबद्ध कॉलेजों में पढ़ते हैं।

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