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नरोदा पटिया: फैसला सुनकर एक घंटा रोती ही रहीं माया कोडनानी, दिन भर कमरे में रहीं बंद

फैसला आने के बाद कोडनानी के छोटे भाई नारायण मेघानी ने कहा, "पिछले दस सालों से हम ट्रॉमेटिक कंडीशन में जी रहे हैं। परमेश्वर पे सब से ज्यादा भरोसा था और भारत की न्यायपालिका में विश्वास रखे हुए थे... हमको पता था कि एक न एक दिन सत्य की विजय होगी।"

Author April 21, 2018 11:17 AM
साल 2002 के नारोदा पाटिया दंगा केस में गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी को शुक्रवार (20 अप्रैल) को बड़ी राहत दी।

साल 2002 के नरोदा पाटिया दंगा केस में गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी को शुक्रवार (20 अप्रैल) को बड़ी राहत दी। हाईकोर्ट ने 16 साल बाद उन्हें मामले से बरी कर दिया। इस फैसले को सुनकर माया कोडनानी खुशी से रो पड़ीं। जब अदालत का फैसला आया, उस वक्त कोडनानी अहमदाबाद के पॉश इलाके श्यामलाल के अपने दो मंजिले बंगले में थीं। फैसला सुनते ही वो रो पड़ीं और करीब घंटेभर तक रोती रहीं। उनके आवास पर तैनात एक सुरक्षाकर्मी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस दौरान मैडम ने बहुत कम फोन रिसीव किए। सुरक्षाकर्मी के मुताबिक कोडनानी ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे मोनीष, जो अमेरिका में नौकरी करते हैं, बहन लता और भाई नारायण मेघानी का ही फोन उठाया और उनसे बात की। शुक्रवार को दिनभर माया कोडनानी कमरे में ही बंद रहीं।

नरोदा पाटिया दंगा केस में फैसला आने के बाद कोडनानी के छोटे भाई नारायण मेघानी ने कहा, “पिछले दस सालों से हम ट्रॉमेटिक कंडीशन में जी रहे हैं। परमेश्वर पे सब से ज्यादा भरोसा था और भारत की न्यायपालिका में विश्वास रखे हुए थे… हमको पता था कि एक न एक दिन सत्य की विजय होगी।” मेघनानी ने अहमदाबाद की एसआईटी कोर्ट के बारे में कहा, “सेशन कोर्ट ने सत्य का खारिज कर दिया था और पता नहीं क्यों उस पर भरोसा नहीं किया था? हो सकता है कि सेशंस जज की कोई व्यक्तिगत समस्या रही हो लेकिन अब मैं उस मामले में नहीं जाना चाहता। 16 साल पहले हुई उस घटना की सच्चाई हमलोग जानते हैं। घटना में मारे गए 97 लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना है लेकिन हम इतना ही कहेंगे कि वहां माया कोडनानी नहीं थी।”

इंडियन एक्सप्रेस से मेघानी ने अहमदाबाद के सैटेलाइट एरिया की योगाश्रम सोसायटी के बंगला नंबर 31 में बात करते हुए इस दंगे से जुड़े मामले में झूठे तथ्य को प्रसारित करने में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को भी आड़े हाथ लिया और कहा,  “कुछ एनजीओ, खासकर तीस्ता सीतलवाड़…जो कभी भी हिंदू समाज के पक्ष में नहीं रही हैं, और विरोध में रही हैं… उसने ये सब किया।” कुछ साल पहले माया कोडनानी का परिवार शाहीबाग एरिया से यहीं शिफ्ट हो गया था। इस बंग्ले के बगल में कोनानी के पति सुरेंद्र कोडनानी ‘नीलकंठ’ नाम से एक क्लिनिक और टीकाकरण केंद्र चलाते हैं। माया और सुरेंद्र कोडनानी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन वो संपर्क में नहीं आ सके।

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