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मायावती का गुजरात में चुनावी शंखनाद, बोलीं- बीजेपी राज में दलितों को नहीं है कोई अधिकार, बसपा जीती तो नहीं होगी उना जैसी घटना

पिछले साल जुलाई में तथाकथित गौरक्षकों ने उना में एक दलित परिवार पर हमला कर दिया था।

एक चुनावी रैली को संबोधित करतीं बसपा सुप्रीमो मायावती। (पीटीआई फोटो)

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज (शनिवार, 23 सितंबर को) गुजरात चुनाव के लिए औपचारिक तौर पर अपनी पार्टी का चुनाव अभियान शुरू कर दिया। बड़ोदरा में एक रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि गुजरात में भाजपा राज में दलितों को कोई भी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब गुजरात में बसपा की सरकार होगी तो उना जैसी घटना नहीं होने दी जाएगी। बता दें कि पिछले साल जुलाई में तथाकथित गौरक्षकों ने उना में एक दलित परिवार पर हमला कर दिया था।

मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर हमला बोला और कहा कि अंबेडकर के नाम पर ये दोनों नेता दलितों का वोट हासिल करने के लिए नाटक कर रहे हैं। 61 वर्षीय मायावती ने कहा कि मोदी जब लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे तो उन्होंने वड़ोदरा में कभी अंबेडकर स्मारक बनने नहीं दिया लेकिन अब उन्हें उनके सम्मान की बड़ी चिंता हो रही है।

मायावती ने दलितों पर हो रहे अत्याचार और भेदभाव की घटना से दुखी होकर धमकी दी कि अगर शंकराचार्यों ने दलितों के खिलाफ भेदभाव नहीं बंद किया तो बौद्ध दर्म अपना लेंगे। उन्होंने कहा, “आज बीजेपी दलितों के बारे में बात कर रही है लेकिन आपलोगों को उसका असली चेहरा जरूर जानना चाहिए। भाजपा शासित गुजरात में दलितों को कोई अधिकार नहीं है। अगर यहां बसपा जीतकर सत्ता में आई तो उना जैसी घटना नहीं होगी बल्कि दलितों को सम्मान दिया जाएगा।”

बसपा ने शनिवार को महासंकल्प दिवस के रूप में मनाया। इसी दिन संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेदकर ने समाज में असामनता से लड़ने का प्रण लिया था। इस मौके पर मायावती वड़ोदरा के संकल्प भूमि भी पहुंचीं। वहां उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं के साथ अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया। बीजेपी को आरक्षण विरोधी बताते हुए मायावती ने कहा कि भाजपा ने मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने और डॉ. अंबेडकर को भारत रत्न देने का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि यह वही बीजेपी है जिसने आरक्षण लागू करने पर वीपी सिंह की सरकार गिरा दी थी।

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