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लोकसभा चुनाव 2019: मोदी के गृह राज्य में कई गांवों ने नहीं दिया वोट, फसल की बर्बादी और जल संकट के खिलाफ है गुस्सा

Lok Sabha Elections 2019: गांववालों के बहिष्कार की जानकारी मिलने के बाद चुनाव अधिकारी गांव पहुंचे और उनसे वोट डालने की दरख्वास्त की।

जामनगर के भांगोर गांव में एक सुनसान मतदान केंद्र। (इंडियन एक्सप्रेस फोटो)

Lok Sabha Elections 2019: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मंगलवार को हुए तीसरी चरण के मतदान के तहत गुजरात में 63.67 प्रतिशत वोटिंग हुई। हालांकि, सूखे से प्रभावित जामनगर, कच्छ और तापी जिले के कुछ गांवों ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार किया। फसलों के खराब होने के बाद इंश्योरेंस में मिले कम भुगतान और जल आपूर्ति को लेकर अपर्याप्त इंतजाम आदि की वजह से गांववालों में बेहद नाराजगी थी। जामनगर लोकसभा क्षेत्र के भांगोर गांव के तीन बोलिंग बूथ के अंतर्गत आने वाले 3344 वोटरों में से एक ने भी मतदान नहीं किया। ये लोग मूंगफली की फसल खराब होने के बाद फसल बीमा के तहत मिले कम भुगतान को लेकर निराश थे।

जामनगर लोकसभा के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर रवि शंकर ने कहा कि उन्होंने गांववालों को मतदान के लिए राजी करने के लिए हर संभव प्रयास किया। रविशंकर ने कहा, ‘हमने (गांववालों को मनाने के लिए) अपने तालुका विकास अधिकारी भेजे। हमने पुलिस अधीक्षक को भी भेजा। हमने उन्हें यह समझाना चाहा कि उनके मुआवजा दिलाने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। यह उनके और इंश्योरेंस कंपनी के बीच हुआ निजी समझौता है। हालांकि, उनका रुख नरम नहीं पड़ा।’

तापी जिले के सोनगढ़ तालुका स्थित तीन गांव बारडोली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। यहां के गांववालों ने चुनाव का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि यहां के लोगों को जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलीं। ये तीन गांव हैं, बुधवाड़ा, पुराना अमलपाड़ा और पुराना कुइलवेल। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, इन तीन गांवों में 1200 वोटर हैं। इन गांववालों ने कुछ वक्त पहले ही ऐलान कर दिया था कि वे वोट नहीं डालेंगे।

गांववालों के बहिष्कार की जानकारी मिलने के बाद चुनाव अधिकारी गांव पहुंचे और उनसे वोट डालने की दरख्वास्त की। अधिकारियों ने यहां तक कहा कि अगर वे लोग किसी पार्टी या प्रत्याशी को वोट नहीं डालना चाहते तो वे नोटा का बटन दबा सकते हैं। तापी के जिलाधिकारी आरएस निनामा ने कहा, ‘हमने हर संभव कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।’

कच्छ जिले के नंदा गांव के लोगों ने भी मतदान का बहिष्कार कर दिया। इस गांव में करीब 549 वोटर हैं, जिनमें से सिर्फ एक ने वोट डाला। कच्छ के एक पुलिस अफसर ने कहा, ‘गांववालों ने कहा कि सरकार उन्हें पीने का साफ पानी नहीं दे रही, इसलिए वे वोट नहीं डालेंगे।’ बता दें कि कच्छ हालिया सालों में सबसे बुरे सूखे के दौर से गुजर रहा है। नेताओं और विभिन्न स्थानीय समुदाय के लीडर्स का कहना है कि सूखे की वजह से पूरे कच्छ में वोटिंग पर असर पड़ा है।

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