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नरेंद्र मोदी के खिलाफ आर्टिकल लिखने पर आ गया था संपादक का फोन- आरएसएस से जुड़े पुराने पदाधिकारी ने बताया वाकया

शाह को पत्रकारिता में 14 साल का अनुभव है, इसके दौरान उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया समूहों के साथ काम किया, शाह ने 55 किताबें लिखी हैं।

Author February 13, 2019 10:41 AM
2008 से एसजेएम की बैठकों में जाना बंद कर दिया था।

हेमंतकुमार शाह ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा एक समारोह के लिए अपने सभागार का उपयोग करने की अनुमति नहीं देने के बाद अहमदाबाद में एचके आर्ट्स कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य के पद से इस्तीफा दे दिया। इस कार्यक्रम में निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। एक दशक पहले तक आरएसएस से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य थे। 60 साल के हेमंतकुमार शाह के पास राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री है और वे छात्र के रूप में जय प्रकाश नारायण की छात्रालय संघर्ष वाहिनी से जुड़े थे। उन्होंने एक पत्रकार के रूप में भी काम किया है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने 2008 से एसजेएम की बैठकों में जाना बंद कर दिया था। “मैं उदारीकरण, वैश्वीकरण और निजीकरण के खिलाफ था, मैं एक मुख्य समूह सदस्य और आरएसएस का प्रिय बच्चा था।” अपने रुख को बदलने के लिए प्रेरित करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “आरएसएस की बॉडी पक्षपाती थी और वह संप्रग प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह और उनकी नीतियों की केवल आलोचना करती थी, लेकिन वसुंधरा राजे सिंधिया, नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोली। मेरी सोच इन लोगों के लिए समस्याग्रस्त हो गई जब मैंने 2002-03 में नरेंद्र मोदी की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की।”

शाह ने याद किया कि 2001 में, उन्होंने एक स्थानीय अखबार के लिए नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार की समरस योजना की आलोचना करते हुए एक लेख लिखा था। उन्होंने कहा, “सुबह लेख प्रकाशित हुआ, मुझे संपादक का फोन आया, मुझसे एंटी मोदी लेख नहीं लिखने के लिए कहा गया।” उनके करीबी दोस्तों का कहना है कि 2002 के गुजरात दंगे एकेडमिक के लिए “टर्निंग प्वाइंट” साबित हुए। शाह के एक सहयोगी कहते हैं, “एक शुद्ध गांधीवादी होने के नाते, 2002 के दंगों से निपटने के तरीके से वह आहत थे।”

शाह को पत्रकारिता में 14 साल का अनुभव है, इसके दौरान उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया समूहों के साथ काम किया, शाह ने 55 किताबें लिखी हैं। उनकी किताब सच्चाई गुजरात की, जो तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात के विकास मॉडल पर थी, 2014 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले जारी की गई और उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों में से सबसे ज्यादा बिकी थी।

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