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साधु बना बेटा तो दिव्‍यांग मां-बाप ने कर दी शिकायत, मांगा ‘हर्जाना’

बकौल पीड़ित दंपति, "हम दिव्यांग हैं। बड़े बेटे को उसकी मानसिक हालत के चलते नौकरी नहीं मिली। पर हम उसी पर निर्भर हैं। हमें लगता है किसी ने उसे बरगलाया है। हमने उसकी कांउसलिंग भी कराई, ताकि वह दोबारा से ठीक हो जाए और सामान्य जिंदगी जिए।"

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

गुजरात में एक दिव्यांग दंपति ने बड़े बेटे के खिलाफ कानूनी सहायता केंद्र में इसलिए शिकायत कर दी, क्योंकि वह सांसारिक जीवन त्याग कर साधु बन गया। दंपति ने बेटे से घर की जिम्मेदारियां समझने और आर्थिक मदद करने की मांग की है। पीड़ित मां-बाप का कहना है, “हमने बड़े बेटे की पढ़ाई पर जीवन भर की पूंजी के रूप में 20 लाख रुपए लगाए। पर उसने अपने फैसले के चलते नौकरी नहीं की। हम लोग अब उसी पर निर्भर हैं। मगर वह कई बार कह चुका है कि उसका हमसे कोई लेना-देना नहीं है।”

‘टीओआई’ के मुताबिक, यह मामला अहमदाबाद शहर का है। 64 वर्षीय लीलाभाई और पत्नी 62 वर्षीय भीखीबेन यहां के अंबावाड़ी इलाके में रहते हैं। उनके बड़े बेटे का नाम धर्मेश (27) है। पीड़ित पक्ष ने अगस्त में गुजरात स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी (जीएसएलएसए) में बेटे की शिकायत दी थी। सोमवार (10 सितंबर) को उन्होंने यहां अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हमारे ऊपर कई सारी चीजों की जिम्मेदारियां हैं, जिनका खर्च लीलाभाई की पेंशन (30 हजार रुपए) से कहीं ज्यादा है।”

बकौल पीड़ित दंपति, “हम दिव्यांग हैं। बड़े बेटे को उसकी मानसिक हालत के चलते नौकरी नहीं मिली। पर हम उसी पर निर्भर हैं। हमें लगता है किसी ने उसे बरगलाया है। हमने उसकी कांउसलिंग भी कराई, ताकि वह दोबारा से ठीक हो जाए और सामान्य जिंदगी जिए।” वहीं, धर्मेश अपने साधु बनने के फैसले पर अटल है। उसने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉर्मासुटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (एनआईपीईआर) से फार्मेसी में मास्टर्स किया था। घर वालों को भी उम्मीद थी कि पढ़ाई के बाद उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी, मगर असल में कुछ और ही हुआ।

2015 में बेटे ने भगवा चोला ओढ़ जब दीक्षा ली, तब मां-बाप हैरान रह गए। उन्होंने लगा कि बेटा समझाने पर वापस सामान्य जिंदगी जीने लगेगा। मगर वह अपने फैसले पर टिका है। उल्टा धर्मेश मां-बाप पर आरोप लगा चुका है कि उन्होंने उसका मानसिक शोषण किया और उसे धर्म के रास्ते से हटाने के लिए अपहरण की साजिश तक रची थी। जीएसएलएसए में कानूनी विशेषज्ञों ने अंग्रेजी अखबार से कहा, “धर्मेश ने मां-बाप को छोटे बेटे पर निर्भर रहने के लिए कहा।” हालांकि, विशेषज्ञों ने दोनों पक्षों की बात सुनकर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की। साथ ही पीड़ित दंपति को सलाह दी कि उनके पास इस मामले को कोर्ट में लेकर जाने का विकल्प भी है।

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