गुजरात दंगों के दोषी बाबू बजरंगी की कोर्ट से फरियाद- दिखाई-सुनाई नहीं देता - Gujarat naroda patiya 2002 riots accused babu bajrangi seek 20 day temporary bail for eye treatment - Jansatta
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गुजरात दंगों के दोषी बाबू बजरंगी की कोर्ट से फरियाद- दिखाई-सुनाई नहीं देता

सुनवाई के दौरान कोर्ट से बजरंगी के वकील ने कहा कि बजरंगी क्रोनिक डायबिटीज़ और आंखों की परेशानी से पीड़ित है।

Author अहमदाबाद | December 22, 2017 4:58 PM
बाबू बजरंगी। (फाइल फोटो)

नरोदा पाटिया में साल 2002 में हुए दंगों के दोषी ठहराए जाने के बाद उम्रकैद की सजा काट रहे बाबू बजरंगी ने गुजरात हाई कोर्ट से सिफारिश की है कि उसे आंखों का इलाज कराने के लिए 20 दिनों की बेल दी जाए। बजरंगी ने दावा किया है कि उसकी आंखें कमजोर हो गई हैं जिसके कारण उसे दिखाई नहीं देता और उसे एक कान से सुनने में भी परेशानी होती है। बजरंगी ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि उसे 20 दिन की बेल दी जाए ताकि वह चेन्नई जाकर अपनी आंखों का इलाज करा सके। बाबू बजरंगी के वकील ने बताया कि डिवीज़न बेंच का नेतृत्व कर रहे जस्टिस हर्ष देवानी ने जेल प्रशासन से बजरंगी की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है और सुनवाई को स्थगित कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट से बजरंगी के वकील ने कहा कि बजरंगी क्रोनिक डायबिटीज़ और आंखों की परेशानी से पीड़ित है। इससे पहले भी कोर्ट से बजरंगी को इलाज के लिए बेल मिल चुकी है। साल 2015 में बजरंगी को इसी समस्या के कारण 90 दिनों की बेल मिली थी। इसके बाद बजरंगी को रेगुलर और अस्ठायी तौर पर मिलने वाली बेल को रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके अलावा बजरंगी ने अपनी पत्नी के द्वारा गुजरात के राज्यपाल से उसे जीवनदान देने की भा मांग की थी। आपको बता दें कि बजरंगी साल 2012 से साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है।

बाबू बजरंगी के अलावा नरोडा पाटिया दंगे के मामले में 30 अन्य लोगों को भी दोषी ठहराया गया है जिनमें पूर्व बीजेपी मंत्री माया कोडनानी भी शामिल हैं। हालांकि माया ने अपनी एक अर्जी में कोर्ट से कहा था कि घटना में उनका कोई हाथ नहीं था और न ही वे उस समय दंगों वाली जगह पर मौजूद थीं। फिलहाल इस मामले में दायर की गई अर्जियों पर फैसला होना अभी बाकी है। गौरतलब है कि 2002 में नरोडा पाटिया में हुए दंगों में 97 मुस्लिमों की हत्या कर दी गई थी। कोडनानी पर आरोप लगे है कि इस दौरान उन्होंने हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किया था, जिसने बाद में हिंसा का रूप ले लिया था। ऐसा कहा जाता है कि 28 फरवरी, 2002 में नरोदा पाटिया में हुए दंगे गोधरा में जलाई गई ट्रेन के बाद उत्पन्न हुआ था।

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